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                <title>geopolitics - Dakshin Bharat Rashtramat</title>
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                            <item>
                <title>पाकिस्तान का दावा- अफ़ग़ान सीमा पर की गई कार्रवाई में 29 आतंकवादी ढेर हुए</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: ISPR]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76736/pakistan-claims-29-terrorists-killed-in-action-taken-on-afghan"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-05/pak-army.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद/दक्षिण भारत।</strong> पाकिस्तान ने सोमवार को कहा कि पाक-अफ़ग़ान सीमा पर खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए ज़मीनी ऑपरेशन में कम से कम 29 आतंकवादी मारे गए।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना मंत्री अत्ता तरार ने सोमवार को बताया कि कराची में शनिवार को आतंकवादियों द्वारा पैरामिलिट्री रेंजर्स के मुख्यालय पर हमला करने की कोशिश के बाद उनके ठिकानों और सुरक्षित पनाहगाहों पर हमले किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">तरार ने पुष्टि की कि ये हमले खैबर पख्तूनख्वा और बलोचिस्तान के लोगों तथा कराची में पाकिस्तान रेंजर्स (सिंध) कैंप पर हाल ही में हुईं कई आतंकवादी घटनाओं के जवाब में किए गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर खुफिया जानकारी के आधार पर एक सुनियोजित ज़मीनी अभियान चलाया। इसके बाद सीमावर्ती इलाके में जमात-उल-अहरार और फ़ित्ना-अल-ख़्वारिज से जुड़े आतंकवादियों के ठिकानों और सुरक्षित पनाहगाहों पर सटीक हमले किए गए, जिसमें 29 ख़्वारिज मारे गए।'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, '28 जून को सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास आतंकवादियों के एक समूह के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर ज़मीनी अभियान चलाया।'</p>
<p style="text-align:justify;">'ऑपरेशन गज़ब लिल हक' को आगे बढ़ाते हुए, पक्की खुफिया जानकारी के आधार पर, 28-29 जून की रात को पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमावर्ती इलाके में जमात-उल-अहरार और फितना-अल-ख्वारिज के आतंकवादी कैंपों और ठिकानों को सटीक रूप से निशाना बनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा पर 53 जगहों पर अफगान तालिबान बलों द्वारा कथित हमलों के जवाब में 26 फरवरी को 'ऑपरेशन गज़ब लिल-हक़' शुरू किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'पक्तिया, पक्तिका और कुनार में सटीक हमलों के दौरान तीन ठिकानों को नष्ट कर दिया गया, जिसमें पच्चीस आतंकवादी मारे गए। इन अड्डों और छिपने की जगहों पर जमा भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी नष्ट कर दिए गए।'</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले, सेना ने बताया कि कराची में रेंजर्स की बिल्डिंग पर हुए हमले में तीन सैनिक मारे गए, जबकि जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मार गिराया और एक आतंकवादी घायल हो गया जिसे गिरफ़्तार कर लिया गया। प्रतिबंधित संगठन जमात-उल-अहरार ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, घायल विद्रोही ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह अफ़ग़ानिस्तान का रहने वाला था, जहां बाजौर के एक स्थानीय आतंकवादी की मदद से हमले की योजना बनाई गई और उसे अंजाम दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान, काबुल में मौजूद तालिबान सरकार पर सीमा पार हमलों के लिए आतंकवादियों को मदद देने का आरोप लगाता रहा है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान में पुलिस और सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर किए जाने वाले चरमपंथी हमलों में तेज़ी आई है। अधिकारियों ने इसके लिए पाकिस्तानी तालिबान, जिसे 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' या टीटीपी के नाम से जाना जाता है, को ज़िम्मेदार ठहराया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 09:40:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिणी लेबनान में इज़राइल ने बोला धावा, 18 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: Netanyahu FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76701/israel-attacks-in-southern-lebanon-killing-18-people"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-06/israel.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>तेहरान/दक्षिण भारत। </strong>इज़राइली लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान के कई कस्बों और गांवों पर हमले किए, जिनमें 18 लोगों की मौत हो गई और 33 लोग घायल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">इज़राइली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने रातभर हिज़्बुल्लाह के सदस्यों और उनके बुनियादी ढांचे पर हमले किए और दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले जारी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेबनान की सिविल डिफेंस ने अल जज़ीरा को बताया कि शुक्रवार सुबह नबातीह ज़िले के हारौफ़ शहर पर इज़राइली हमले में आठ लोग मारे गए।</p>
<p style="text-align:justify;">अल-मायादीन के अनुसार, लड़ाकू विमानों ने नबातीह ज़िले के तौल, जेज़ीन ज़िले के अल-जबूर, हब्बूश शहर और नबातीह ज़िले के अल-दुवैर शहर के इलाकों पर भी हमले किए।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर इज़राइल के लगातार हमलों से पाकिस्तान की मध्यस्थता में वॉशिंगटन के साथ चल रही शांति वार्ता पटरी से उतर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं </strong></p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग के अनुसार, अगले 60 दिनों तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एसएनएससी ने एक बयान में घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए आवेदन करने वालों को 60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं देना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अनुसार, पर्शियन गल्फ वॉटरवे अथॉरिटी को निर्देश दिया गया है कि वह मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अनुरोधों पर तेज़ी से और प्राथमिकता के साथ कार्रवाई करे और उनका जवाब दे।</p>
<p style="text-align:justify;">रास्ते में मौजूद खास हालात और कुछ सुरक्षा खतरों को देखते हुए, और साथ ही सुरक्षित ट्रैफ़िक सुनिश्चित करने और समुद्री हादसों को रोकने की ज़रूरत के कारण, यह ज़रूरी है कि जहाज़ उन्हें बताए गए रास्ते और समय पर ही गुज़रें, ताकि धीरे-धीरे ट्रैफ़िक की संभावना बढ़ाई जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए ऑपरेशनल इंतज़ाम और तकनीकी जानकारी की घोषणा पर्शियन गल्फ़ वॉटरवे अथॉरिटी करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बारूदी सुरंगें हटाने समेत अन्य मुद्दों पर, इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के पैराग्राफ 5 के अनुसार ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 17:57:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का वचन, नया धोखा या भ्रम?</title>
                                    <description><![CDATA[आज वे किसके साथ खड़े हैं? ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76696/trumps-promise-is-a-new-deception-or-illusion"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/promise.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्ता के दौरान जो टिप्पणियां कीं, उन्हें बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत है। उनके ये शब्द क्या संकेत देते हैं- 'भारत और अमेरिका के बीच कोई रक्षा समझौता नहीं है, लेकिन अगर भारत पर कोई हमला होता है तो मदद के लिए अमेरिका मौजूद रहेगा'? कुछ लोग इसे भारत के साथ अमेरिका की मजबूत साझेदारी से जोड़कर देख रहे हैं। हमें इसके दूसरे पक्ष को भी देखना चाहिए। प्राय: डोनाल्ड ट्रंप जैसे बयान देते हैं, उसके बिल्कुल विपरीत काम करते हैं। एक राष्ट्रपति के शब्दों में गंभीरता, दृढ़ता और विश्वसनीयता होनी चाहिए। ट्रंप इन विशेषताओं से कोसों दूर रहते हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में उनका बर्ताव एक ऐसे ज़िद्दी बच्चे जैसा है, जिसे मनचाही चीज चाहिए, तुरंत चाहिए, अगर न मिले तो वह तोड़फोड़ मचा देता है और जरूरत पड़ने पर खुलकर झूठ बोलता है। आखिर ट्रंप को भारत की रक्षा की इतनी फिक्र क्यों होने लगी? क्या वे भारत के कोई बड़े हितैषी हो गए हैं? वैसे, ट्रंप को भारत के रक्षा संबंधी मामलों की फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है। इसके लिए भारत सरकार है, मजबूत सशस्त्र बल हैं और करोड़ों देशभक्त नागरिक हैं। जिस दिन कोई दुश्मन इस भारत भूमि पर हमले का दुस्साहस करेगा, उसे करारा जवाब मिलेगा। 'ऑपरेशन सिंदूर' में क्या हुआ था? भारतीय मिसाइलों ने पीओके और पाकिस्तान में सौ से ज्यादा खूंखार आतंकवादियों को उनके ठिकानों समेत मिट्टी में मिला दिया था। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनों को खिलौनों की तरह धराशायी कर दिया था। इसलिए ट्रंप भारत की रक्षा को लेकर बेफिक्र रहें। यह काम हम समस्त देशवासी भलीभांति कर लेंगे।  </p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप एक काम जरूर करें। अपने 'आतंकवादी मित्र' पाकिस्तान की मदद बंद करें। उसके प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की शान में झूठी वाहवाही न करें। जब 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान पर जोरदार प्रहार हो रहे थे, तब ट्रंप क्या कर रहे थे? वे पाकिस्तान की हिमायत करने में व्यस्त थे। जिन आतंकवादियों ने पहलगाम में भारतीय नागरिकों की हत्या की थी, क्या ट्रंप ने उन्हें दंडित करने के संबंध में आज तक एक भी शब्द कहा? उन्होंने तो नोबेल शांति पुरस्कार की रट लगा ली थी, जिसके लिए अनगिनत बार झूठ बोले। हाल में जहाज़ों पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत हुई, लेकिन ट्रंप ने क्या कहा? यही कि 'यह बहुत सख़्त पेशा है और हम इन लोगों से प्यार करते हैं और इस पर ज़रूर साथ काम करेंगे!' क्या एक राष्ट्रपति का यह बयान होना चाहिए? ट्रंप एक आत्ममुग्ध व्यक्ति हैं, जो पुराने झूठ को बार-बार दोहराने में अपनी महानता समझते हैं। आज वे किसके साथ खड़े हैं? हम जानते हैं कि वे उन हत्यारों के साथ खड़े हैं, जिनके हाथ बेकसूर हिंदुस्तानियों के खून से रंगे हुए हैं। जब ऐसा व्यक्ति यह कहता है कि 'अगर भारत पर कोई हमला होता है तो मदद के लिए अमेरिका मौजूद रहेगा', तो उस पर बिल्कुल विश्वास नहीं करना चाहिए। क्या ट्रंप के पास ऐसी कोई गुप्त सूचना है कि भारत पर हमला होगा? कहीं वे ऐसे तत्त्वों की कोई मदद तो नहीं कर रहे हैं, जो भारत पर हमला करने के लिए षड्यंत्र रचते हैं? हमारे देश के लिए इन खतरों का सामना कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान और चीन हमारे साथ खुली दुश्मनी रखते हैं। हाल के वर्षों में बांग्लादेश और मालदीव जैसे देश भी आंखें दिखाने लगे हैं। नक्सलवाद दम तोड़ चुका है, लेकिन उग्रवाद के किसी नए स्वरूप से इन्कार नहीं किया जा सकता है। भारत को बहुत सावधान रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 09:10:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्लोवाकिया ने संरा सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76679/slovakia-supported-indias-permanent-membership-in-the-un-security-council"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2023-01/flag.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्रातिस्लावा/दक्षिण भारत। </strong>स्लोवाकिया ने 'सुधारित' संरा सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य यूरोपीय देश की अहम यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी और स्लोवाकिया के उनके समकक्ष रॉबर्ट फिको के बीच हुई बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त बयान में, दोनों पक्षों ने संरा और यूएनएससी जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में व्यापक सुधारों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें 'अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाने वाला' बनाया जा सके।<br /> <br />दोनों नेताओं ने सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त बयान में कहा गया, 'इस संदर्भ में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्लोवाकिया के लगातार समर्थन की सराहना की।'<br /> <br />मोदी और फिको ने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षवाद के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संरा सहित वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत लंबे समय से सुधारित और विस्तारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। उसका तर्क है कि 15 सदस्यों वाली इस संस्था का मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और आज की वैश्विक वास्तविकताओं को ठीक से नहीं दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली की उम्मीदवारी को कई यूरोपीय देशों के साथ-साथ जी4 समूह के अन्य सदस्यों — ब्राज़ील, जर्मनी और जापान — सहित कई देशों का समर्थन मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संरा सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य - चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका - और दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्लोवाकिया ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) - जो 48 देशों का एक मल्टीलेटरल एक्सपोर्ट कंट्रोल सिस्टम है - में भारत की सदस्यता के प्रति अपने सकारात्मक रुख को फिर से दोहराया।<br /> <br />सन् 1993 में स्लोवाकिया की आज़ादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया, जिसका मकसद रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुले और नियमों पर आधारित इंडो-पैसिफिक, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और नेविगेशन की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:45:33 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता हुआ, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: WhiteHouse FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76673/peace-agreement-between-america-and-iran-trump-will-open-the"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/peace.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन/दक्षिण भारत।</strong> स्विट्जरलैंड में समझौते पर आमने-सामने दस्तखत करने के बाद, अमेरिका और ईरान ने अपनी 107 दिन की लड़ाई खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य वह संकरा समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया भर की तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा ले जाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर यह घोषणा की, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव कम हुआ। अधिकारियों ने बताया कि शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। सभी को बधाई।' उन्होंने आगे कहा कि इससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा का स्वागत किया है। गुटेरेस ने इसे संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक अहम कदम बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक के जारी बयान में कहा गया कि गुटेरेस ने उस घोषणा का स्वागत किया है जिसमें कहा गया है कि 'अमेरिका और ईरान एक शांति समझौते पर सहमत हुए हैं। इस समझौते में तुरंत और स्थायी युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करने की व्यवस्था है।'</p>
<p style="text-align:justify;">डुजारिक ने कहा, 'यह संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक अहम कदम है।'</p>
<p style="text-align:justify;">महासचिव ने शांति समझौते तक पहुंचाने वाली बातचीत का समर्थन करने में पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और क्षेत्र के अन्य देशों की रचनात्मक भूमिका के लिए गहरी सराहना व्यक्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने फिर से कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक स्थायी और व्यापक शांति हासिल करने में पक्षों का समर्थन करने के लिए तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने सरकारी टेलीविज़न पर समझौते की पुष्टि की, लेकिन कहा कि ईरान इसे तब तक लागू करना शुरू नहीं करेगा जब तक कि शुक्रवार को इस पर हस्ताक्षर न हो जाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 09:42:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होंगे: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: WhiteHouse FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76668/trump-will-sign-america-iran-agreement-on-sunday"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन/इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए रविवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसके तुरंत बाद रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खोल दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की ये टिप्पणियां पाकिस्तान के उस संकेत के कुछ घंटों बाद आईं, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान बातचीत के आखिरी चरण में हैं और समझौते के लिए इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह रविवार को होना है।<br /> <br />हालांकि, बताई गई समय-सीमा पर ईरान की ओर से कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, 'यह डील कल साइन होने वाली है। इसके साइन होते ही होर्मुज जलडमरूमध्य सभी के लिए खुल जाएगा।' यह महीनों के टकराव और बातचीत के बाद एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी का संकेत है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर समझौता उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ तो नए हमले हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'हम ईरान और पूरे मध्य पूर्व के साथ लंबे समय तक काम करने के लिए उत्सुक हैं। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्दी, आसानी से और सुचारु रूप से पूरी हो जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमारे पास एक आखिरी विकल्प भी है, जिसका इस्तेमाल दोबारा कभी न करना पड़े, ऐसी उम्मीद है।'</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रस्तावित समझौते की तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन' से भी की।<br /> <br />'बराक हुसैन ओबामा की ईरान के साथ हुई डील, यानी जेसीपीओए, परमाणु हथियार हासिल करने का एक आसान, शानदार और सीधा रास्ता था; अगर यह डील होती, तो ईरान के पास छह साल पहले ही परमाणु हथियार आ गए होते और वह अब तक उनका इस्तेमाल भी कर चुका होता।'</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'ईरान के साथ मेरा समझौता बिल्कुल इसके उलट है— परमाणु हथियार न होने की पक्की गारंटी! असल में, अब वे परमाणु हथियार न तो चाहते हैं और न ही उनके पास कोई परमाणु हथियार होगा— चाहे उसे खरीदा जाए, विकसित किया जाए या किसी भी अन्य तरीके से हासिल किया जाए।'</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने आगे दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से बेअसर कर दिया गया है और कहा कि बाकी बचे परमाणु सामग्री को बाद के चरण में ठिकाने लगा दिया जाएगा।<br /> <br />उन्होंने कहा, 'सही समय आने पर, जब सब कुछ शांत होगा, तो हम अपने शानदार बी-2 बॉम्बर्स और उनके बेहतरीन पायलटों की मदद से अंदर जाकर ग्रेनाइट के विशाल डूबे हुए पहाड़ों के नीचे दबी न्यूक्लियर डस्ट को निकालेंगे और उसे ईरान या अमेरिका, कहीं भी, डाउनब्लेंड करके नष्ट कर देंगे।'</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते को अगले 24 घंटों में अंतिम रूप दिया जा सकता है, क्योंकि इस्लामाबाद ने संकेत दिया था कि रविवार को एक इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह होने की उम्मीद है।</p>
<p style="text-align:justify;">उप-प्रधानमंत्री इशाक डार और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद, शनिवार को विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में इसके संकेत मिले। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत के अंतिम चरण का स्वागत किया, जिसके तहत कल (रविवार) इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह होना है। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अहम घटनाक्रम क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता लाने में योगदान देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बयान में कहा गया है कि सऊदी विदेश मंत्री ने पूरी प्रक्रिया के दौरान मध्यस्थता और बातचीत के समर्थन में पाकिस्तान की 'लगातार और निरंतर कोशिशों' की सराहना की। <br /> <br />दोनों नेताओं ने इस महीने के आखिर में मिस्र में होने वाली 'रीजनल फोर फॉरेन मिनिस्टर्स' (आर-4) की आगामी बैठक पर भी चर्चा की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 09:38:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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                <title>ईरान के साथ युद्ध खत्म, सप्ताहांत तक शांति समझौता होगा: ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: WhiteHouse FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76661/trump-will-end-the-war-with-iran-and-reach-a"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-01/donald-trump2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन/दक्षिण भारत। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता लगभग पूरा हो चुका है और उम्मीद है कि इस सप्ताहांत यूरोप में इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने ईरान के तेल उद्योग पर कब्ज़ा करने की धमकी देने के कुछ ही घंटों बाद उस देश पर सैन्य हमले का फ़ैसला रद्द कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस साइनिंग सेरेमनी में शामिल होंगे, जो इस वीकेंड यूरोप में हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने बातचीत के ताज़ा दौर के बारे में कतर, यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान समेत मध्य-पूर्व के देशों के नेताओं से बात की है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, 'हमने अभी-अभी ईरान के साथ युद्ध को लेकर एक बढ़िया समझौता किया है। दस्तावेज़ लगभग तैयार हैं, तो देखते हैं। यह काम काफ़ी तेज़ी से हो जाना चाहिए।'</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित समझौता तीन महीने से चल रहे उस संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों में सबसे बड़ी कूटनीतिक कामयाबी होगी, जिसमें हज़ारों लोग मारे गए हैं और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर बुरा असर पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता लगभग पूरा हो चुका है और इस पर यूरोप में इसी सप्ताहांत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि तेहरान ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित समझौते पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप का यह ऐलान ईरान पर तय सैन्य हमले को रद्द करने के कुछ घंटों बाद आया। उन्होंने ईरान पर बहुत ज़ोरदार हमला करने और उसके मुख्य तेल एक्सपोर्ट हब, खर्ग आइलैंड पर कब्ज़ा करने की अपनी पहले की धमकी को वापस ले लिया। </p>
<p style="text-align:justify;">जॉर्जिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर बर्ट जोन्स के समर्थन में हुई एक टेली-रैली में ट्रंप ने और आगे बढ़कर यह घोषणा कर दी कि यह टकराव असल में खत्म हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि आपने सुना या नहीं, लेकिन हमने आज (गुरुवार) ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया है, और वे कभी भी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गए हैं - जिस बात पर हमने ज़ोर दिया था। यही तो हमारा मकसद था।'</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने फिर दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना तेहरान के खिलाफ वॉशिंगटन के अभियान का मुख्य मकसद था।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, 'वे किसी भी तरह से परमाणु हथियार नहीं खरीदेंगे और न ही विकसित करेंगे। उनके पास परमाणु हथियार नहीं होगा।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:55:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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                <title>यह है पाकिस्तान का 'कश्मीर प्रेम'!</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान ने पीओके को बंधक बना रखा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76651/this-is-pakistans-love-for-kashmir"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/love-kashmir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सशस्त्र बलों द्वारा की गई कार्रवाई में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत होने की घटना ने फिर एक बार यह साबित कर दिया है कि इस पड़ोसी देश का 'कश्मीर और कश्मीरियत' से कोई संबंध नहीं है। जम्मू-कश्मीर में जो लोग पाकिस्तान के इशारों पर अलगाववाद का राग अलापते रहे हैं, उन्हें इस घटना की जानकारी जरूर होनी चाहिए। पीओके में सशस्त्र बलों के हाथों मारे गए लोग क्या मांग रहे थे? सस्ता आटा, सस्ती बिजली और महंगाई से थोड़ी राहत। इतनी-सी बात पर मुनीर के सिपाहियों ने उनकी लाशें बिछा दीं! पाकिस्तान किसी कश्मीरी का हमदर्द नहीं है। वह लोगों को भ्रमित करने के लिए एक मुद्दा ज़िंदा रखना चाहता है, इसलिए हर मंच से कश्मीर की रट लगाता रहता है। इस घटना से यह भी साबित हो गया कि जिन्ना ने जिस मजहबी राष्ट्र का सपना देखा था, वह धोखे के सिवा कुछ नहीं है। अगर वह सच होता तो आटा मांगने पर कत्ले-आम न होता। पाकिस्तान ने पीओके को बंधक बना रखा है। वह जनता को सिर्फ जज्बाती नारे दे सकता है। नौजवानों को बम-बंदूक थमा सकता है। वह भूखे पेट को रोटी नहीं दे सकता। घर-घर बिजली पहुंचाना उसके बस की बात नहीं है। किसी को इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि ऐसी घटना भविष्य में नहीं होगी। आने वाले वर्षों में पीओके समेत पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में ऐसे नजारे देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि इस पड़ोसी देश ने न तो बांध निर्माण की ओर ध्यान दिया, न खेती की उन्नत विधियां विकसित कीं, न किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराए और न कृषि शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कुछ किया।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तो पाकिस्तान में हर साल आटे के लिए लंबी-लंबी कतारें लगती हैं। कई बार लोगों में भयंकर झड़पें तक हो जाती हैं। आटे की बोरी पर कब्जा करने की कोशिश में लोग जान गंवा चुके हैं। जबकि भारत में क्या हो रहा है? यहां अनाज के ढेर लगे हैं। खलिहान भरे पड़े हैं। जिसे जितना आटा चाहिए, उतना ले जाए। सरकार मुफ्त राशन दे रही है सो अलग। आटा, चावल, दाल, तेल, नमक, मिर्च, सब्जी ... किसी चीज की कोई कमी नहीं है। सोचिए, जो लोग एलओसी के इस पार यानी जम्मू-कश्मीर में हैं, वे कितने सौभाग्यशाली हैं! शुक्र मनाएं कि यहां तिरंगा लहरा रहा है, भारतीय सशस्त्र बल अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों की रक्षा कर रहे हैं। जो लोग उस पार हैं या बहकावे में आकर उधर चले गए, आज उन्हें आटा मांगने पर दनादन गोलियां मिल रही हैं। सस्ती बिजली के बदले सांसें छीनी जा रही हैं। यह है पाकिस्तान का सच! जो मुल्क अवाम को रोटी नहीं दे सकता, सस्ती बिजली नहीं दे सकता, उस पर गोलियां बरसाता है, वह किसी और को क्या दे देगा? जो खुद नफरत में डूबा हुआ है, उसके पास दूसरों को देने के लिए क्या होगा? भारत में करोड़ों उपभोक्ताओं को नाम मात्र के शुल्क या मुफ्त में बिजली मिल रही है। केंद्र सरकार जिस तरह सौर ऊर्जा अपनाने पर जोर दे रही है, उससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि इस दशक के आखिर तक भारत बिजली उत्पादन में बड़ा कीर्तिमान रच देगा। यहां बिजली बहुत सस्ती हो जाएगी। हाल में पश्चिम एशिया में अशांति के कारण जब एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कुछ दिक्कतें आईं तो घरों में इंडक्शन चूल्हों का उपयोग बढ़ गया। अगर सबकुछ ठीक रहा तो भविष्य में एलपीजी पर निर्भरता कम हो जाएगी। जो (अलगाववादी) इतनी उज्ज्वल संभावनाओं वाले देश के बजाय बदहाल पाकिस्तान के साथ अपना भविष्य देखता है, वह अपने और अपने परिवार के लिए बदहाली का सौदा करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 09:07:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>'अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से कम से कम 13 लोगों की मौत हुई'</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: ISPR]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76647/at-least-13-people-died-in-pakistans-airstrike-in-afghanistan"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2025-04/pak-army.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>काबुल/दक्षिण भारत। </strong>अफ़गानिस्तान ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान ने देश को निशाना बनाते हुए नए हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">इन देशों के बीच महीनों से लड़ाई चल रही है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हालिया हवाई हमलों में अफ़गानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई। </p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान की ओर से इन हमलों पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच भयंकर लड़ाई चल रही है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। यह लड़ाई फरवरी के आखिर में तब शुरू हुई थी, जब अफ़ग़ानिस्तान ने अपने इलाके में पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तान पर सीमा-पार हमला किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान का आरोप है कि अफ़ग़ानिस्तान उन आतंकवादियों को पनाह देता है जो पाकिस्तान के अंदर जानलेवा हमले करते हैं, खासकर पाकिस्तानी तालिबान को, जिसे 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' या टीटीपी के नाम से जाना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह गुट अफ़गान तालिबान से अलग है, लेकिन उसका सहयोगी है। तालिबान ने सन् 2021 में अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं की अफरातफरी भरी वापसी के बीच अफ़गानिस्तान में सत्ता पर कब्ज़ा किया था और तब से वहां शासन कर रहा है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:00:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत के साथ अपने रिश्तों को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है रूस: पुतिन</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: kremlin website]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76628/russias-putin-is-committed-to-further-strengthening-its-relations-with"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2024-10/vladimir-putin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सेंट पीटर्सबर्ग/दक्षिण भारत।</strong> रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि रूस, भारत के साथ अपने पुराने और भरोसेमंद रिश्तों को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की ओर से नई दिल्ली पर रूस के साथ सहयोग कम करने का दबाव बनाने की कोशिशें न सिर्फ़ बेकार हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदेह भी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत में, पुतिन ने भारत की आर्थिक वृद्धि और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की तारीफ़ की और कहा कि रूस, भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुतिन ने कहा, 'भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अभी शानदार आर्थिक विकास दर दिखा रहा है।' उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले सालों में दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े तक पहुंच जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पुतिन ने कहा कि रूस के साथ अपने संबंधों को सीमित करने के लिए भारत पर पश्चिमी देशों के दबाव का कोई बुरा असर नहीं पड़ा है और ऐसे तरीकों का उल्टा असर होना तय है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'अमेरिका कुछ मामलों में रूस के साथ सहयोग को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन सभी यह समझ गए हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत (और नरेंद्र मोदी) पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदेह है।'</p>
<p style="text-align:justify;">पुतिन ने कहा, 'इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि यह दबाव कहां से आ रहा है। हमें इसके कोई नकारात्मक परिणाम नहीं दिखते हैं।'<br /> <br />उन्होंने कहा, 'मौजूदा हालात के कोई गंभीर नतीजे नहीं हैं। हम भारत के साथ अपने संबंध बढ़ा रहे हैं और ऐसा करना जारी रखेंगे।'</p>
<p style="text-align:justify;">रूसी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत-रूस संबंधों को लेकर कुछ पश्चिमी देशों की राजधानियों में बेचैनी बढ़ रही है। अमेरिका लगातार भारत से रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने का आग्रह करता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुतिन ने कहा, 'भारत दुनिया की उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसने सबसे तेज़ आर्थिक विकास दर दिखाई है। यह कोई अचानक हुई घटना नहीं है। यह उस कड़ी मेहनत का नतीजा है जो भारत सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कर रही है।'</p>
<p style="text-align:justify;">रूसी राष्ट्रपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ भारत के राजनयिक संबंधों से रूस के साथ उसके पुराने और भरोसेमंद रिश्तों में कोई रुकावट नहीं आती और न ही वे कमज़ोर होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जब पुतिन से पूछा गया कि क्या वॉशिंगटन के साथ भारत की गहरी नज़दीकी रूस के लिए कोई ढांचागत टकराव पैदा करती है, तो उन्होंने कहा, 'हमें खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ अपने संबंध विकसित कर रहा है जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए महत्त्वपूर्ण मानता है।'</p>
<p style="text-align:justify;">पुतिन ने कहा कि रूस, भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मानता है और उसे नई दिल्ली के किसी अन्य देश के साथ द्विपक्षीय संबंधों से कोई नकारात्मक परिणाम नहीं दिखता। उन्होंने कहा, 'भारत एक महान देश और लोकतंत्र है और रूस इसके साथ अपने संबंध बढ़ाता रहेगा।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:00:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>कांग्रेस ने पूछा: क्या प्रधानमंत्री के लिए तथाकथित फादरलैंड असली मदरलैंड से कहीं ज्यादा मायने रखती है?</title>
                                    <description><![CDATA[Photo: IndianNationalCongress FB Page]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76608/congress-asked-whether-the-so-called-fatherland-is-more-important-to"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2022-12/congress2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/दक्षिण भारत। </strong>कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इज़रायल द्वारा लेबनान को तबाह किए जाने और अमेरिका-ईरान समझौते को 'सबोटैज' करने के मामले पर 'पूरी तरह से चुप' हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या उनके लिए 'तथाकथित फादरलैंड' उनकी अपनी मातृभूमि से कहीं ज़्यादा मायने रखती है?</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा, 'पश्चिम एशिया में युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है।' उन्होंने कहा, 'ऐसे किसी समझौते का तत्काल प्रभाव होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और तेल की कीमतों पर दबाव कम होने के रूप में सामने आएगा- और इन दोनों मुद्दों से भारत के बड़े हित जुड़े हुए हैं।'</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा, 'लेकिन यह बातचीत अब तक अंतिम रूप नहीं ले सकी है, जिसकी मुख्य वजह लेबनान में इज़राइल की जारी सैन्य कार्रवाई है, जिसमें अभूतपूर्व घुसपैठ देखने को मिली है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर बेहद नाराजगी और गुस्सा जाहिर किया है, यहां तक कि अपशब्दों का इस्तेमाल भी किया है।'</p>
<p style="text-align:justify;">जयराम रमेश ने कहा, 'दुनिया के कई अन्य देशों ने भी लेबनान में इज़राइल के हमले की निंदा की है। हैरानी की बात नहीं कि जिस एक सरकार के मुखिया ने इज़राइल द्वारा लेबनान को तबाह करने और अमेरिका-ईरान समझौते को पटरी से उतारने की कोशिशों पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। क्या तथाकथित फादरलैंड उनके लिए उनकी असली मदरलैंड से कहीं ज्यादा मायने रखती है?'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 10:48:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[News Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजराइल से क्या सीखें?</title>
                                    <description><![CDATA['मोसाद' के कारनामे जानकर लोग हैरान रह जाते हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dakshinbharat.com/article/76607/what-to-learn-from-israel"><img src="https://www.dakshinbharat.com/media/400/2026-06/learn.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इस कथन में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि 'इजराइल के लिए भारत में जबर्दस्त प्रेम है।' भारत के लोग इजराइल को अपना सच्चा मित्र मानते हैं। दोनों देशों के इतिहास में कई समानताएं हैं। इजराइल आतंकवाद से पीड़ित रहा है। इसके हजारों निर्दोष लोगों ने आतंकवाद के कारण प्राण गंवाए हैं। भारत भी पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का सामना कर रहा है। विदेशी आक्रांताओं ने हमें सदियों तक लहूलुहान किया था। यहूदी भी सदियों तक दुनियाभर में प्रताड़ित होते रहे। आज इजराइल एक मजबूत देश है। वह आत्मविश्वास से भरा हुआ है। उसकी खुफिया एजेंसी 'मोसाद' के कारनामे जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। इजराइल क्षेत्रफल की दृष्टि से छोटा-सा देश है, लेकिन यह बड़ी-बड़ी ताकतों को नकेल डालना जानता है। इसके पास ऐसा बहुत कुछ है, जिससे अन्य देश सीख सकते हैं। जब इजराइल का निर्माण हुआ था तो इसे रेगिस्तानी और पथरीली जमीन मिली थी... बिल्कुल बंजर, लेकिन इजराइल के लोगों ने अपने भाग्य को कोसने के बजाय मेहनत और विज्ञान का रास्ता अपनाया। उन्होंने रेगिस्तान को हरा-भरा बना दिया। वहां बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से खेत लहलहाने लगे। इजराइल ने फल, सब्जी, अनाज, दूध और शहद उत्पादन में मिसाल कायम की। वहां पेयजल की कमी थी। उसके वैज्ञानिकों ने समुद्री जल का विलवणीकरण कर दिया। इजराइली सरकार ने देश के कोने-कोने में पेयजल की लाइन बिछा दी। इजराइल के युवाओं के लिए सैन्य प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। जब भी देश को उनकी जरूरत पड़ती है, वे मोर्चे पर जाने के लिए तैयार रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक मतभेद वहां भी खूब हैं, लेकिन जब देशहित की बात आती है तो सब एकजुट हो जाते हैं। इजराइल पर आतंकवादी संगठन आए दिन हमले करते रहते हैं। उन्हें विदेशी समर्थन प्राप्त होता है। इजराइली नागरिकों ने मुश्किल हालात में शांत और अनुशासित रहना सीख लिया है। इस देश में जगह-जगह बंकर बने हुए हैं। जब भी सरकार द्वारा अलर्ट भेजा जाता है, सभी लोग बंकर और सुरक्षित जगहों में छिप जाते हैं। कहीं अफरा-तफरी नहीं मचती। घायलों की मदद के लिए हर कोई तैयार रहता है। घरों में प्राथमिक उपचार का सामान उपलब्ध रहता है। इजराइल में छल-कपट, धोखे, लालच, झूठे वादे और भौतिक लाभ के सब्ज-बाग दिखाकर किसी का धर्मांतरण कराना अपराध की श्रेणी में आता है। जो व्यक्ति ऐसा करता है, वह कठोर दंड पाता है। इस देश की कुल आबादी लगभग एक करोड़ है। इससे ज्यादा लोग तो दुनिया के कई शहरों में रहते हैं। फिर भी इजराइल का वैश्विक प्रभाव बहुत ज्यादा है। यह संख्या से ज्यादा गुणवत्ता पर विश्वास करता है। इसने ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान को अपनी ताकत बनाया है। इसने अपनी सुरक्षा के लिए तकनीक विकसित की। इजराइली ड्रोन और मिसाइलों से दुश्मन थर्राते हैं। हिज़्बुल्लाह, हमास जैसे संगठनों के दर्जनों कमांडरों को इजराइल ने ड्रोन की मदद से ढूंढ़ा और मार गिराया। सात अक्टूबर, 2023 को जब हमास ने इजराइल पर अचानक हमला कर कई नागरिकों की हत्या की थी, तब मोसाद की बहुत आलोचना हुई थी। उसके बाद इजराइल ने बहुत जबर्दस्त पलटवार किया। दुनिया ने देखा कि उक्त कट्टरपंथी संगठनों के आका ही नहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई तक लपेटे में आ गए। इजराइल लड़ना जानता है, जूझना जानता है। वह अपना अस्तित्व बचाने के लिए हर संभव कोशिश करना जानता है। उसमें 'शत्रुबोध' गजब का है। वहां विदेशी आक्रांताओं, अत्याचारियों और लुटेरों का महिमा-मंडन नहीं किया जाता। वहां आतंकवादियों के लिए मोमबत्ती लेकर कोई नहीं निकलता। जो कौम अपने धर्म और देश के साथ इतनी मजबूती से जुड़ी होती है, वह बड़े से बड़े खतरे का हंसते-हंसते सामना कर लेती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

                <link>https://www.dakshinbharat.com/article/76607/what-to-learn-from-israel</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 09:04:33 +0530</pubDate>
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