KV Hindi Question Bank
KV Hindi Question Bank
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CLASS – X
SESSION : 2019 – 20
के य व यालय संगठन
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1
A WORD TO MY DEAR STUDENTS
It gives me great pleasure in presenting the Students' Support Material to all KV students of
class X. The material has been prepared keeping in mind your needs when you are preparing
for final exams and wish to revise and practice questions or when you want to test your
ability to complete the question paper in the time allotted or when you come across a
question while studying that needs an immediate answer but going through the text book
will take time or when you want to revise the complete concept or idea in just a minute or try
your hand at a question from a previous CBSE Board exam paper or the Competitive exam to
check your understanding of the chapter or unit you have just finished. This material will
support you in any way you want to use it.
A team of dedicated and experienced teachers with expertise in their subjects has prepared
this material after a lot of exercise. Care has been taken to include only those items that are
relevant and are in addition to or in support of the text book. This material should not be
taken as a substitute to the NCERT text book but it is designed to supplement it.
The Students' Support Material has. all the important aspects required by you; a design of the
question paper, syllabus, all the units/chapters or concepts in points, mind maps and
information in tables for easy reference, sample test items from every chapter and question
papers for practice along with previous years Board exam question papers.
I am sure that the Support Material will be used by both students and teachers and I am
confident that the material will help you perform well in your exams.
Happy learning!
2
FOREWORD
The Students' Support Material is a product of an in-house academic exercise undertaken by our
subject teachers under the supervision of subject expert at different levels to provide the students a
comprehensive, yet concise, learning support tool for consolidation of your studies. It consists of
lessons in capsule form, mind maps, concepts with flow charts, pictorial representation of chapters
wherever possible, crossword puzzles, question bank of short and long answer type questions with
previous years' CBSE question papers.
The material has been developed keeping in mind latest CBSE curriculum and question paper
design. This material provides the students a valuable window on precise information and it covers
all essential components that are required for effective revision of the subject.
In order to ensure uniformity in terms of content, design, standard and presentation of the material,
it has been fine tuned at KVS HQRS level.
I hope this material will prove to be a good tool for quick revision and will serve the purpose of
enhancing students' confidence level to help them perform better. Planned study blended with hard
work, good time management and sincerity will help the students reach the pinnacle of success.
Best of Luck
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Hindi
म सं या वषयव तु पृ ठ सं या
04. अप ठत ग या श 7 - 10
05. अप ठत प या श 11 - 13
पा य – पु तक एवं पू रक पु तक पर आधा रत
रचना मक लेखन
09. नबंध-लेखन 63 - 68
10. प -लेखन 68 - 72
11. व ापन 72 - 74
13. न – प ा प , आदश नप 81 - 91
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पर ा हे तु अंक वभाजन
3 पद प रचय (4 अंक) 4
4 रस (4 अंक) 4
(अ) ग य खंड 13 26
(ब) का य खंड 13
स पू रक पा य पु तक कृ तका भाग 2
4 लेखन 20
कु ल 80
6
अप ठत गदयांश
‘अप ठत’ का अथ होता है क जो पढ़ा नह ं गया हो, अथात जो पा य पु तक से नह ं लया गया हो ।
इसके अंतगत गदयांश और कावयांश दोन होते ह। इनसे संबि धत न छा क समझ एवं उनके ान- े
व तार के आकलन हे तु कया जाता है । इससे छा क अ भ यि त मता का वकास होता है ।
छा ोपयोगी नदश
अप ठत गदयांश और पदयांश पर आधा रत न को हल करते समय छा को अधो ल खत बात का यान
रखना चा हए –
1 - दये गए गदयांश और प या श को यानपू वक पढ़ ।
2 - पढ़ते समय दए गए न को यान म रख ।
3 - उ तर क भाषा सरल एवं सं त होनी चा हए ।
4 - उ तर िजतना अपे त हो उतना ह लख ।
5 - उ तर पू ण वा य म द िजए ।
अप ठत गदयांश
(1)
न 1. न न ल खत ग यांश को पढ़ कर पू छे गए न के उ तर द िजए ।
संसार म दो अचू क शि तयाँ ह—वाणी और कम । कुछ लोग वचन से संसार को राह दखाते ह
और कुछ लोग कम से । श द और आचार दोन ह महान शि तयाँ ह । श द क म हमा अपार
है । व व म सा ह य, कला, व ान, शा सब श द-शि त के तीक माण ह । पर कोरे
श द यथ होते ह, िजनका आचरण नह ं होता । कम और यवहार के बना कोई भी वचन,
स और साथक नह ं है ।
न संदेह श द शि त महान है , पर चर थाई सनातनी शि त तो यवहार है । महा मा
गाँधी ने इन दोन क क ठन और अ ुत साधना क थी । महा मा जी का जीवन इन दोन से
यु त था । वे वाणी और यवहार म एक थे । जो कहते थे वह करते थे । यह उनक महानता
का रह य था । क तू रबा ने श द क अपे ा कृ त क उपासना क थी य क कृ त का उ तम
व चर थाई भाव होता है । क तू रबा ने कोर शाि दक, शा ीय, सै ां तक श दावल नह ं
सीखी थी । वे तो कम क उपा सका थी । उनका व वास श द क अपे ा कम म अ धक था ।
वे जो कहती थी उसे पू रा करती थी ।
(क) स जन यि त संसार के लए या करते ह? 2
(ख) गाँधी जी महान य थे ? 2
(ग) संसार क कौन सी अचू क शि तयाँ ह ? 2
(घ) ‘ न संदेह’ और ‘ चर थाई’ का या अथ है ? 1
(च) ग यांश का उपयु त शीषक द िजए। 1
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उ तर
(क) स जन यि त संसार के लए या करते ह ? 2
उ तर - स जन यि त संसार को राह दखाते ह कं तु वे सफ श द का नह ं बि क आचरण का
यवहार करते ह । य क कम के बना वचन साथक नह ं है ।
(ख) गाँधी जी महान य थे ? 2
उ तर - गांधीजी महान इस कारण थे य क उ ह ने श द एवं आचरण दोन क क ठन और
अ ुत साधना क थी उनका जीवन इन दोन से यु त था । वे वाणी और यवहार म
एक जैसे थे।
(ग) संसार क कौन सी अचू क शि तयाँ ह ? 2
उ तर - संसार म दो अचू क शि तयाँ ह -वाणी और कम । कं तु कम के बना या आचरण के बना
वाणी यथ है । दोन के साहचय म ह साथकता न हत है ।
(घ) ‘ न संदेह’ और ‘ चर थाई’ का या अथ है ? 1
उ तर - न संदेह का अथ है ‘ बना संदेह के’ और चर थाई का अथ है ‘हमेशा के लए थायी’
(च) ग यांश का उपयु त शीषक द िजए- 1
उ तर - वाणी और कम क एकता
[ 2 ]
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(ङ) कैसे लोग ेम को कलं कत करते ह ? 1
उ तर
(क) भखार क भाषा और ेम क भाषा म या अंतर है ? 2
उ तर - भखार क भाषा म गड़ गड़ाना अ नवाय त व है। इसके अ त र त उसम आतु रता एवं
पु र कार ा त करने क इ छा भी होती है। इसके वपर त ेम क भाषा म न तो
गड़ गड़ाना होता है ना ह आतु रता और ना ह पु र कार क चाहत ।
(ख)भ त ई वर से ेम य करता है ? 2
उ तर - भ त ई वर से ेम इस लए करता है य क बना ेम कए वह रह नह ं सकता उसे
ई वर के त ेम म ह अपने जीवन क साथकता नजर आती है
उ तर
(क) सामा य पु ष और महापु ष म या अंतर है? 2
उ तर - सामा य पु ष और महापु ष दोन ह नाशवान होते ह कं तु सामा य पु ष से वपर त
महापु ष कुछ ऐसे काय कर कर शर र छोड़ते ह जो उनके बाद अ य लोग वारा याद कए
जाते ह । यह ऐसे काय होते ह िजनके पीछे उ च आदश होते ह और वे चर थाई होते ह ।
(ख) गाँधीजी ने मानव जीवन क या या कस कार क है? 2
उ तर - गांधीजी ने मानव जीवन को सम ता म दे खा है उ ह ने उसे सामािजक आ थक और
नै तक उपधाराओं म नह ं बांटा । उनके ि टकोण म मानव जीवन म उ चत काय के त
न ठा , येय क पू त के लए सेवा और कसी वचार के त समपण आव यक है ।
(ग) साधन और सा य के वषय म गाँधीजी के या वचार थे ? 2
उ तर - गांधीजी ने साधन और सा य दोन को शुभ एवं उपयु त होने क बात कह है ।उनके
अनु सार सा य को पू रा करने के लए अपनाए जाने वाले साधन का भी यान रखा जाना
चा हए । इस कार उ ह ने सदा सा य को ह मह व नह ं दया बि क साधन पर भी उतना
ह बल दया है ।
(घ) उ चत शीषक द िजए? 1
उ तर - गांधी का जीवन दशन या साधन एवं सा य का मह व
(ङ) संयु त वा य बनाइए- 1
उ तर - वे अपने पीछे काय छोड़कर गए इस लए अ य लोग वारा याद कए जाते ह ।
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अप ठत का या श
उ तर
(क) आज़ाद य आव यक है ? 2
उ तर - आजाद इस लए आव यक है ता क लोग अपने प र म के अनु प फल ा त कर सके एवं
शोषण क तमाम ग त व धय को समा त कर सक ।
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[2]
न न ल खत का यांश को पढ़कर पू छे गए न के उ तर द िजए ।
हँसा ज़ोर से जब, तब दु नया
बोल – इसका पेट भरा है।
और फूटकर रोया जब,
तब बोल – नाटक है, नखरा है।
जब गु मसुम रह गया, लगाई
तब उसने तोहमत घमंड क ।
कभी नह ं वह समझी इसके
भीतर कतना दद भरा है।
दो त क ठन है यहाँ कसी को भी
अपनी पीड़ा समझाना
दद उठे , तो सू ने पथ पर
पाँव बढ़ाना, चलते जाना।
(क) जब क व गु मसुम रह गया तो उस पर या आरोप लगाया गया ? 2
(ख) दु नया क व के दयगत भाव को य नह ं समझ सक ? 2
(ग) जब क व हँसा तो दु नया ने या कहा ? 1
(घ) जब क व रोया तो उसे लोग ने या कहा ? 1
(ङ) सू ने पथ पर पाँव बढ़ाना का या अथ है ? 1
उ तर
(क) जब क व गु मसु म रह गया तो उस पर या आरोप लगाया गया ? 2
उ तर - जब क व गु मसु म रह गया तो उस पर यह आरोप लगाया गया क वह अ यंत घमंडी है ।
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[3]
न न ल खत का यांश को पढ़कर पू छे गए न के उ तर द िजए ।
मानता हू ँ भू ल हु ई, खेद मु झे इसका
स पे वह काय उसे धाय हो जो िजसका
मानता हू ँ और सब, पर हार नह ं मानता
अपनी अग त नह ं आज भी म जानता
गरना या उसका उठा ह नह ं जो कभी ?
म ह तो उठा था, गरता हू ँ जो अभी
फर भी उठू ँ गा और बढ़के रहू ँगा म
नर हू ँ पु ष हू ँ म चढके रहू ँगाम |
तन िजसका हो मन और आ मा मेरा
चंता नह ं बाहर उजेला या अँधेरा है |
चलना मु झे है, बस अंत तक चलना ,
गरना ह मु य नह ं मु य है संभलना |
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याकरण - पद प रचय
“श द” भाषा क वतं एवं साथक इकाई है और यह श द जब वा य म यु त हो जाते ह तो पद
कहलाते ह I इन पद के वषय म व तार से जानना अथात इनका याकर णक प रचय दे ना पद
प रचय कहलाते है I
जैसे – छा प लख रहा हैI
उदाहरण –
1. रमेश यहाँ तीसरे बंगले म रहता था I
रमेश - सं ा यि तवाचक, कता करक, एकवचन, पु ि लंग,
यहाँ - अ यय , थानवाचक या वशेषण ,
तीसरे - वशेषण सं यावाचक, बंगले - वशे य ,एकवचन, पु ि लंग , मसू चक ,
बंगले म – सं ा जा तवाचक, अ धकरण कारक, एकवचन, पु ि लंग,
रहता था - या अकमक , पु ि लंग एकवचन , भू तकाल
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अ यास
रे खां कत पद का प रचय ल खए –
1. हम अपने दे श पर मर मटगे I
2. त दन रा य वज व यालय म फहराया जाता है I
3. इतने म दो ा णय का पेट भर जाता हैI
4. वहाँ कौन बैठा है I
5. म भोजन पका रह हू ँ I
6. म उसे कानपु र म मलूँ गा I
7. वह धीरे –धीरे बोल रहा था I
8. सै नक बहु त बहादुर था I
9. अ छा ! तो यह बात हु ई I
10. यह पु तक मेरे छोटे भाई क है I
11. मु झे पढ़ना था ,इस लए म बाजार नह ं गई I
12. वह पताजी के साथ जाने वाला था I
13. मेर बहन नौवीं क ा म पढ़ता है I
14. वीर सै नक अपनी वीरता का दशन यु भू म म करता है I
15. मने अपने पता जी को प लखा I
16. प र म के बना धन नह ं ा त होता है I
17. हम लोग ने कल लाल कला दे खा I
18. मन क दुबलता को याग दो I
19. मेर बात भल भां त - सु नो I
सरल वा य
संयु त म वा य
वा य
3 . उपवा य के भेद ल खए –
क रमेश ने कहा क म कल द ल जा रहा हूIँ
ख जो छा प र मी होता हैIवह सदा सफल होता है,
ग वह पु तक कौन सी है -जो आपको पसंद हैI
घ जब चलोगे तभी चल पडू ँगा I
ड. जैसा म चाहता हू ँ वैसा वह गाती है I
च िजसक कलम है वह आए ले जाए I
वा य
वा य का शाि दक अथ है बोलने का वषय I हम जो कुछ कहते है तब हमारे यान के क म कोई
यि त ,व तु अथवा काय अव य रहता है I अत: या के िजस प से यह ात हो क या का
योग कता के अनु सार है या कम के अनु सार या भाव के अनु सार उसे वा य कहते है I
1॰ कतृवा य
2॰ कमवा य
3॰ भाववा य
कतृवा य के उदाहरण-
1. वह प र म नह ं कर सकता ।
2. गीता चल नह ं सकती ।
3. चोर को पु लस ने पकड़ा ।
4. मने गत वष कार खर द ।
5. आओ , कुछ बात कर I
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कमवा य के उदाहरण-
1. पु लस के वारा चोर पकड़ा गया
2. पेड़ काटा गया I
3. माल वारा पौध लगाए गए I
4. छा वारा मदान कया गया I
5. धानमं ी वारा भवन का उ घाटन कया गया I
भावा य के उदाहरण –
1. मु झसे चला नह ं जा सकता I
2. मु झसे बैठा नह ं जाता है I
3. चलो, अब चला जाए I
4. अशोक से चु प नह ं बैठा जाता I
5. तु मसे सार रात कैसे जागा जाएगा I
कतृवा य म बद लए –
1. राज वारा सम या का हल कया गया I
2. रोगी से उठा नह ं जाता ।
3. राम वारा प लखा गया I
4. पानवाले वारा पान खाया गया
5. मो हनी वारा गीत गाया गया I
6. आइए, बैठा जाए I
7. मा लक वारा झोले से फल नकाला गया I
कमवा य म बद लए –
1. राम ने बाण से रावण का वध कया I
2. यामा ने क वता लखी I
3. छोट ब ची ने बैल को रोट खलाई I
4. च मेवाला घर- घर च मा बेचता था I
5. राज ने रह य क सार बात बताई I
6. मोहन कताब पढ़ रहा था I
7. ब चे मैदान म खेल रहे थे I
भाव वा य म बद लए-
1. वह उठ नह ं सकता I
2. आओ, चले I
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3. प ी उड़ नह ं सका I
4. रोगी ब तर से उठ गया I
5. ब चा रो रहा था I
वा य बताइए-
1. डॉ टर वारा रोगी को दावा द गईI
2. वह धू प म खड़ा था I
3. वह कुस पर बैठकर समाचार प पढ़ रहा था I
4. प ी आकाशा म उड़ रहे थे I
5. पौध लगाए गए I
रस
रस वा तव म का य क आ मा है I कसी भी सा ह य म रस के बना का य स ता क क पना नह ं
क जा सकती है I इसी लए सं कृ त म आचाय व वनाथ ने कहा –“वा यम रसा मक का यम” अथात
सरस वा य समू ह को का य कहते ह I का य म भाव क उ पि त होती है I जब कसी सा ह य को
पढ़कर मनु य अपनी नजी सम याओं को याद न रखकर, क वता म भाव से जु ड़ जाए तो हमारे मन
के थाई भाव रस म प र णत हो जाते ह I िजसका अनु भव मन ह मन ह कया जा सकता हैI
भरत मु न ने रस क प रभाषा द है –
1 रत ग ृं ार
2 हास हा य
3 शोक क ण
4 ोध रौ
5 उ साह वीर
6 भय भयानक
7 जु गु सा वीभ स
8 व मय अदभु त
9 नवद शांत
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10 वा स य वा स य
11 भगवत र त भि त
संचार भाव – ये मन म उठाने गरने वाले भाव है I थायी न हो कर णक होते ह Iये अवसर के
अनु कूल अनेक थायी भाव का साथ दे ते ह I थायी भाव के साथ- साथ बीच –बीच म जो मनोभाव
कट होते ह , उ ह संचार भाव कहते ह I
(ख) वयोग ग ृं ार - नायक-ना यका अथवा ेमी- े मका के बछड़ने पर वयोग के कारण मन म आए
ेम के भाव को वयोग ग ृं ार कहते ह ।
उदाहरण – न स दन बरसात नैन हमारे ,
सदा रह त पावस ऋतु हमपे , जब से याम सधारे ।
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हो वहाँ हा य रस होता है I
उदाहरण - हाथी जैसी दे ह गैडे जैसी खाल
तरबू जे सी खोपड़ी खरबू जे से गाल |
3॰ वीर रस –जहाँ कोई य दे खकर मन म उ साह और वीरता का भाव उ प न होता है उसे वीर रस
कहते है I
उदाहरण – वीर तु म बढ़े चलो, धीर तु म बढ़े चलो
सामने पहाड़ हो संह क दहाड़ हो ,
तु म नडर डटे रहो I
4॰ रौ रस - जब मन म ोध या तशोध का भाव पैदा होता है तो रौ रस क अ भ यि त होती
है I
उदाहरण- रे ! नृप बालक कालबस , बोलत तो ह न संभार I
धनु ह सम पु रा रधनु, ब दत सकल संसार II
5॰ भयानक रस – जहाँ कसी य को दे खकर भय भाव क अ भ यि त हो उसे भयानक रस कहते
है I
उदाहरण – एक ओर अजगर ह ल ख ,एक ओर मृगराय I
वकल बटोह बीच ह , परयो मू रछा खाय II
6॰ वीभ स रस - जहाँ कसी य को दे खकर मन म घृणा (जु गु सा) का भाव पैदा हो वहाँ वीभ स
रस होता है I
उदाहरण - आँख नकाल उड़ जाते , ण भर उड़कर आ जाते ।
शव जीभ खींचकर कौवे , चु भला-चु भला कर खाते ।।
7. क ण रस – य यि त या व तु क हा न पर मन म आए शोक के भाव को क ण रस कहते हैI
उदाहरण - अबला जीवन हाय तेर यह कहानी।
आँचल म है दूध और आँख म है पानी ।।
8॰ अदभु त रस - कसी व तु के दे खने या सु नने से जो आ चय का भाव मन म पो षत होता है उसे
अदभु त रस कहते है I
उदाहरण - कह ं साँस लेते हो घर-घर भर दे ते हो
उड़ने को नभ म तु म पर-पर कर दे ते हो ।
प त से लद कह ं हर , कह ं लाल
कह ं पड़ी है ऊर म मंद-गंध-पु प-माल ।
9॰ शांत रस – संसार के त वैरा य का भाव मन म शांत रस क उ पि त करता है I
उदाहरण - मेरो मन अनत कहाँ सु ख पावै,
जैसे उड़ी जहाज को पंछ पु न जहाज पर आवै
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10. भि त रस – ई वर के त मन म ेम का भाव भि त रस कहलाता है ।
उदाहरण - मेरो तो ग रधर गोपाल दूसरो न कोई
11. वा स य रस – शशु के त मन म आए ेम के भाव को वा स य रस कहते ह I
उदाहरण - यशोदा ह र पालने झु लावे
तु हार यह दं तु रत मु सकान, मृतक म भी डाल दे गी जान
अ यास के न-
1. थायी भाव कसे कहते है ?
2. क ण रस का थायी भाव ल खए I
3. हा य रस का थायी भाव ल खए I
4. वान को मलते दूध भात भूखे बालक अकुलाते है
माँ क छाती से लपट लपट जाड़े क रात बताते है-
उपयु त पंि त म कौन सा रस है ?
प ठत बोध ( तज – भाग 2)
1 - नेताजी का च मा :
नेताजी का च मा पाठ दे शभि त क भावना से भरपू र कहानी है | कहानी म कै टन च मेवाले के
मा मम से दे श के कर ड़ो लोग के दे शभि त पू ण योगदान को उभारा गया है जो अपने – अपने तर के
से दे शभि त तो करत ह पर तु वे परदे के पीछे रह जाते ह । दे शभि त-भावना बड़ म ह नह ं ,
बि क ब च (आने वाल पी ढ़य ) म भी भर हु ई है ।
2 – बालागो बन भगत
बालागो बन भगत नामक पाठ म लेखक रामबृ बेनीपु र जी ने ऐसे यि त का रे खा च खींचा है जो,
मानवता, लोकसं कृ त, सामू हक चेतना तथा करनी - कथनी म एकता रखने वाले का तीक ह ।
लेखक के अनु सार मनु य कुछ व श ट गु ण के आधार पर स यासी हो सकता है पर वा य आडंबर
जैसे वेश, दखावा यु त कम करने से कोई स यासी नह ं होता । बालगो बन अपने गु ण एवं कम के
कारण स यासी ह । साथ ह लेखक ने समाज म या त कुर तय और बु राइय पर करारा हार कया
है ।
3 – लखनवी अंदाज़
लेखक ने इसम उस सांमती वग पर यंग कया है, जो स चाई से अंजान है और अपनी बनाई
बनावट दु नया म जी रहे ह । इनके लए दे श, समाज से कोई सरोकार नह ं ह। इनके लए इनका
झू ठा अ भमान सबकुछ ह । इस पाठ के नवाब ऐसे ह ह । अपनी झू ठ शान को कायम रखने के
लए वह खीर को बना खाए फक दे ते ह । नवाब वयं जानते थे क उनक है सयत और ि थ त
ऐसी है क वह खीर को न फके, पर तु लेखक के स मु ख अपनी शान को न ट होते हु ए भी नह ं
21
दे ख सकते थे। अत: बना खाए खीर को फक दया। इस लए लेखक ने इस पाठ को उ ह ं को
सम पत कर के इसका नाम लखनवी अंदाज़ रखा।
4- मानवीय क णा क द य चमक
तु त सं मरण फादर का मल बु के पर लखा गया है । फादर का मल बु के ज मे तो रै सचैपल,
बेि जयम म पर तु उ ह ने अपनी कम भू म बनाया भारत को। फादर अपने को भारतीय कहते थे। वे
एक सं यासी थे, पर तु पार प रक अथ म नह ं। उनक नील आँख,े बाँह खोल गले लगाने को आतुर
रहती थीं, ममता और अपन व का भाव हर एक यजन के लए उमड़ता रहता था।
5. एक कहानी यह भी
आ मक य शैल म लखे गए इस पाठ म ले खका ने उन यि तय और घटनाओं के बार म लखा है
िज ह ने उनके लेखक य यि त व के नमाण म अपनी मह वपू ण भू मका नभाई । ले खका काले रं ग
क , दुबल -पतल सी तथा म रयल थी, गोरापन तथा खू बसू रती पसंद करने वाले अपने पता क उपे ा
का उ ह शकार होना पड़ता । समाज म व श ट दजा हा सल करने के लए एक तरफ तो पता ने
ले खका को उ च- श ा दलाई तथा घर पर आने वाले बु जी वय के बीच ले खका को बैठकर दे श –
दु नया क प रि थ तय पर होने वाल बहस व चचा म शा मल कया ले कन दूसर तरफ सामािजक
छ व को बनाए रखने के लए उ होने उस वत ता आंदोलन का ह सा बन कर सड़क पर जु लस
ू
नकालने व भाषण बाजी करने से रोका। पता के उपे त यवहार तथा दोहरे यि त व ने ले खका
को व ोह वभाव का बना दया ।
माँ का ममतालु वभाव, सहनशीलता, धैय व मजबू र म लपटा याग ले खका का आदश न
बन सका। कॉलेज क ह द ा या पका शीला अ वाल ने उ ह जैने , अ ेय, यशपाल, ेमचंद आ द
क रचनाएँ पढ़ने के लए े रत कया । साथ ह ले खका के मन म दे श क आजाद के लए जोश
और जु नू न भी पैदा कया । िजससे ले खका के यि त व म संघषशीलता तथा जु झा पन आ गया ।
फल व प, उ ह ने वत ता आंदोलन म स य भागीदार क तथा महान सा ह यकार बनीं।
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8.सं कृ त [केवल पढ़ने के लए]
सं कृ त नबंध हमे स यता और सं कृ त से जु ड़े अनेक ज टल नो से टकराने क े रणा दे ता है ।
इस नबंध म लेखक ने अनेक उदाहरण दे कर ये बताने का यास कया है क स यता और सं कृ त
कसे कहते है, दोनो एक ह व तु है अथवा अलग-अलग। वे स यता को सं कृ त का प रणाम मानते
हु ए कहते है क मानव सं कृ त अ वभा य व तु है। उ हे सं कृ त का बंटवारा करने वाले लोगो पर
आ चय होता है और दुख भी । उनक ि ट म जो मनु य के लए क याणकार नह ं है , वह न
स यता है और न सं कृ त ।
का य ख ड
पद –सूरदास
सूरदास के का य ‘सूरसागर’ से संक लत मरगीत म गो पय क वरह पीड़ा को च त कया गया
है। ेम संदेश के बदले ी कृ ण के योग संदेश लाने वाले उ व पर गो पय ने यं य बाण म अपने
दुख का दय पश उलाहना दया है और ी कृ ण के त अन य ेम कट कया है।
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उ साह
तु त क वता म क व बादल म ां त का वर सु नता है। वह गडगड़ाते वर पर मो हत होकर कहता
है – ओ बादल ! तु म खू ब गरजो, कड़को, गड़गड़ाओ। तु म अपनी भयंकर गजन–तजन से इस आकाश
को घेर लो तु हारे केश कतने सु ंदर, काले और घु ंघराले ह। ये क पना के व तार के समान घने ह।
क व बादल को क व क सं ा दे ते हु ए कहता है – अपने दय म बजल चमक छपाए हु ए ओ क व !
संसार को नया जीवन दे ने वाले ओ क व ! तु म अपनी भावनाओं म व छपाकर समू चे संचार म
जोश का पौ षमय वर भर दो । हे बादल ! तु म गरजो , गड़गड़ाओ।
अट नह ं रह है
‘अट नह ं रह है’ क वता एक कृ त सौ दय वणन क छायावाद क वता है िजसमे फागु न मास क
म ती का मनमोहक वणन कया गया है। नराला जी ने मानवीकरण का योग करते हु ए फागु न के
वासं तक भाव को अ भ यि त कया है। फागु न मास म कह मादक हवाएँ चल रह ह तो कह प ी
आकाश म उड़ रहे है । शोभा इतनी अ धक है क अपने आप म समा नह ं पा रह है।
यह दं तु रत मु कान
छोटे शशु क दं तु रत और छलह न मु कान दे खकर क व का वास य उमड़ पड़ा है। शशु क ाणवान
मु कान का पश पाकर कठोर पाषाण भी पघल जाते है । छ वमान दं तु रत मु कान दे खकर कठोर
दयी भी भावु क हो उठते ह।
फसल
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क यादान
इस क वता म माँ , बेट को परपरागत आदश प से हट कर जीने क सीख दे रह है । क व यह
मानता है क समाज यव था वारा ि य के लए यवहार संबंधी जो तमान गढ़ लए जाते ह
उ ह आदश के मु ल मे म बाँध दया जाता है । कोमलता के गौरव म कमजोर का उपहास छुपा रहता
है । बेट माँ के सबसे नकट और उसक सु ख दुख क साथी होती है वह उसक अं तम पू ंजी है ।
इस क वता म कोर भावु कता ह नह ं बि क माँ के सं चत अनु भव क पीड़ा क ामा णक
अ भ यि त है ।
संगतकार
इस क वता म उन यि तय को दशाया गया है जो मु य गायक के वर म वर मला कर उसके
वर को ग त दान करते ह। संगतकार मु य गायक को उस समय सहारा दे ता है जब उसका वर
भार हो जाता है । कभी-कभी तो मु य गायक को उ साह दान करता है जब उसका आ म व वास
डगमगाने लगता है ।
कृ तका
माता का आँचल
लेखक ने ‘माता का आँचल’ पाठ म शैशवकाल के शैशवीय या-कलाप को रे खां कत कया है । माता
पता के नेह और म वारा मल जु लकर खेल जाने वाले खेल का वणन कया है । लेखक ने
प ट कया है क ब चा पता के साथ भले ह अ धक समय बताए क तु आपदाओं के समय ब चा
अपनी माँ के आँचल म ह शरण लेता है । पता से अ धक माता क गोद य और र ा करने म
समथ तीत होती है ।
जाज पंचम क नाक
तु त पाठ म भारतीय सरकार मान सकता को बहु त ह प ट प से य त कया है । वष से हम
िजनके गु लाम रहे ह उन अं ेज के भारत से चले जाने पर भी हमार मान सकता परतं ा क बनी हु ई
है । टे न क महारानी के भारत आने पर सभी अपने काम काज छोड़ कर उनके आगमन क तैयार
एवं वागत म स पू ण सरकार तं जु ट जाता है । ऐसी ि थ त म जाज पचम क टू ट नाक को
लगाने के लए भारतीय अपनी नाक काटने को त पर दखाई दे ते है । यह एक यंग धान कहानी
है।
साना – साना हाथ जोड़ी
यह पाठ एक या ा वृतांत है | इसमे ले खका पू व तर भारत के सि कम रा य क राजधानी गंगटोक
और उसके आगे हमालय क या ा का वणन तु त करती है | ले खका हमालय के सौ दय का
अदभुत और का या मक वणन करती है | इस पढ़कर हमालय का पल-पल प रव तत होता सौ दय
हमार आख के सामने साकार हो उठता है |गंगटोक का असल नाम “गंतोक” है िजसका अथ होता है
‘पहाड़’|
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एह ं ठै या झु लानी हैरानी हो रामा (केवल पढ़ने के लए)
इस पाठ म कजल गा यका दुलार के वभाव का च ण कया गया है | दुलार अपने कठोर वभाव
के लए जानी जाती है पर उसके दय म कोमल भाव भी है | वह उदार दय है उस पर टु नु के
ेम-भावो का भाव है | कहानीकार ने प ट कया है क दे श ेम क भावना जब बल होती है तो
वह िजस भी ि थ त म हो दे श ेम के रा ते ढू ं ढ लेती है | दे श क सीमाओं पर दे श के श ु ओं से
लड़ना ह दे श ेम नह है जब क स पू ण कत य का पालन भी दे शभि त है |
*****************************************************************************
(नेताजी का च मा)
(1)
1 न न ल खत गदयांश को पढ़कर पू छे गए न के उ तर द िजये-
हालदार साहब को पान वाले वारा एक दे शभ त का इस तरह मज़ाक उड़ाया जाना अ छा नह ं लगा |
मु ड़कर दे खा तो अवाक रह गए | एक बेहद बू ढ़ा म रयल सा लंगड़ा आदमी सर पर गांधी टोपी और
आंख पर काला च मा लगाए एक हाथ म एक छोट सी संदक
ू ची और दूसरे हाथ म बाँस म टं गे बहु त
से च म लए अभी-अभी एक गल से नकला था और अब एक दुकान के सहारे अपना बाँस टका रहा
था य क इस बेचारे क कोई दुकान भी नह है | फेर लगाता है | हालदार साहब च कर म पड़ गए|
पू छना चाहते थे, इसे कै टन य कहते है ? या यह इसका वा त वक नाम है ?
ले कन पानवाले ने साफ बता दया था क वह इस बारे म और बात करने को तैयार नह |
ाईवर भी बेचैन हो रहा था, काम भी था | हालदार साहब जीप म बैठकर चले गए |
(अ) कै टन का मज़ाक कसने उड़ाया और बुरा कसे लगा?
(ब) वह च म कस तरह बेचता था ?
(स) उस बू ढ़े यि त का नाम कै टन य रखा गया था ?
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उ तर:
(अ) कै टन का मज़ाक पानवाले ने उड़ाया और हालदार साहब को इसका बहु त बु रा लगा |
(ब) कै टन फेर लगाकर च मा बेचा करता था |
(स) कै टन क दे शभि त क भावना के कारण लोग उसे कै टन कहा करते थे |
(2)
बार-बार सोचते या होगा उस कौम का जो दे श क खा तर घर-गृह थी जवानी-िज़ंदगी सब कुछ
होम कर दे ने वालो पर भी हँसती और अपने लए बकने के मौके ढू ं ढती है | वे दुखी हो गए | 15
दन बाद फर उसी क बे से गु जरे | क बे म घु सने से पहले खयाल आया क क बे क दय
थल म सुभाष क तमा अव य ह त था पत होगी परं तु सु भाष क आख पर च मा नह
होगा | ......... य क मा टर बनाना भू ल गया ...... और कै टन मर गया | सोचा आज वहाँ कगे
नह ,ं पान भी नह खाएँग,े मू त क तरह दे खगे भी नह ं सीधे नकाल जाएंगे | ाईवर से कह
दया चौराहे पर कना नह ं , आज बहु त काम है, पान आगे कह ं खा लगे | ले कन ाईवर आदत
से मजबू र था और उसक आंखे चौराहे आते ह मू त क तरह उठ गयी | कुछ ऐसा दे खा क चीखे
– रोको ! जीप पीड म थी, ाईवर ने ज़ोर से ेक मारा | रा ता चलते लोग दे खने लगे | जीप
कते-न- कते हालदार साहब जीप से कूद कर तेज़-तेज़ कदमो से मू त क तरह लपके और उसके
ठ क सामने जाकर एटै शन म खड़े हो गए | मू त क आख पर सरकंडे से बना छोटा च मा रखा
हु आ था, जैसे ब चे बना लेते है | हालदार साहब भावु क है, इतनी सी बात पर उनक आख भर
आई |
लघू तर य न :
(1) पानवाले का एक रे खा च तु त क िजये |
उ तर: पानवाला वभाव से बहु त ह बातू न,ी हसोड़, और मज़ा कया था | वह शर र से मोटा था |
उसक त द नकल रहती थी | उसके मुँह म पान ठु सा रहता था | पान के कारण वह ठ क से बात
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तक नह ं कर पाता था और हँसने पर उसके लाल-काले दाँत खल उठते थे | वह बाते बनाने म
उ ताद था | उसक बोल म हँसी और यंग का पु ट बना रहता था |
बालगो बन भगत
(1)
बेटे के या कम म तू ल नह ं कया; पतोहू से ह आग दलाई उसक | क तु य ह ा क
अव ध पू र हो गयी, पतोहू के भाई को बु लाकर उसके साथ कर दया, यह आदे श दे ते हु ए क इसक
दूसर शाद कर दे ना | इधर पतोहू कहती – म चल गयी तो बु ढ़ापे मे कौन आपके लए भोजन
बनाएगा , बीमार पड़े तो , कौन एक चु लू पानी भी दे गा । ले कन भगत का नणय अटल था ।
1. भगत पतोहू को अपने पास य नह ं रखना चाहते थे ?
2. पु क चता क आग भगत ने कससे दलवाई और य ?
3. ‘तू ल न दे ना’ मु हावरे का आशय है –
उ तर :
1- भगत अपनी पतोहू को अपने पास नह ं रखना चाहते थे य क वे उसके भ व य को सु खी
दे खना चाहते थे ।
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2 – भगत ने अपने पु क चता म अि न अपनी पतोहू से दलवाई य क वे कबीर अनु यायी
थे और उ ह ं क तरह समाज म या त कुर तय को नह ं मानते थे और उनका वरोध
करते थे ।
3 – ‘तू ल न दे ना’ मु हावरे का अथ है – बढ़ – चढ़कर काम न करना ।
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नबंध लेखन
आचाय रामचं शु ल ने लखा ह — “ग य य द लेखक क कसौट ह तो ग य क कसौट ह नबंध।
“ नबंध से ह भाषा क पू ण शि त का वकास संभव ह। एक अ छे नबंध के गु ण ह :
नबंध के कार: सामा यतः तीन कार ह: 1) ववरणा मक, 2) वचारा मक, 3) भावा मक
रचना क ि ट से नबंध के तीन अंग होते ह: 1) भू मका, 2) वषय-व तु, 3) उपसंहार
चा हए।
का म बना रहना चा हए। वषय ववेचन सरल,शु और सधी हु ई भाषा म होना चा हए।
63
“का आतंक भी दया ह। जैस-े जैसे इसका सार बढ़ रहा ह उसी ती ता से साइबर अपराध का खतरा
भी बढ़ रहा ह। साइबर अपराधी संगणक वाइरस के मा यम से इंटरनेट से जु ड़े हु ए संगणकोसे सं चत
सू चनाएँ, आंकड़े, ो ाम को ख म कर दे ते ह। इस कार से दे श और न ल क पार प रक दु मनी
नकाल जाने लगी ह। कोई पा क तानी हैकर भारतीय वैबसाइट को हैक कर दे ता है तो कोई चीनी
हैकर अमर क वैबसाइट पर डांका डाल रहे ह।
वषय-व तु : साइबर अपराध के े म कए गए पर ण से पता चलता ह क है कं ग क अ धकतर
घटनाएँ पू व कमचा रय के सहयोग से ह होती ह। लगभग अ सी तशत बात म पू व कमचा रय
का हाथ था, वे इन हैकर को कंपनी के “आँकड़ा कोश” तक पहु ँचा दे ते ह और इसके बाद पासवड,
े डट काड नंबर आ द चु रा कर उ हे ख म कर दे ते ह। कुछ ऐसी वेबसाइ स ह जो डिजटल उपकरण
उपल ध कराती ह जो है कं ग म मददगार होती ह। इनक सहायता से दूसरे संगणक क जाम कया
जाता ह या नयं ण म लया जाता ह।
साइबर अपराध से करोड़ डॉलर का नु कसान होता ह, अपराधी ई-मेल स टम को जाम
करते ह, मोबाइल टे ल फोन कंप नय के संगणक म घुसपैठ कर वहाँ से कॉ लंग काड चु रा कर लाख
का नु कसान पहु ँचाते ह, कुछ वष पू व अमे रका म साइबर अपरा धय ने “मे लसा” नामक वाइरस
इंटरनेट पर फैला कर ई-मेल क प नय को आठ करोड़ डॉलर का नु कसान दया था । जानकार कहते
ह क ॉडबड के बढ़ते चलन से साइबर अपराधी अपनी मज से जब चाह तब कसी भी संगणक
तक पहु ँच सकगे।
इस से समाज के सभी वग के लोग चं तत ह, यापार आज इंटरनेट से ह पू र दु नया
से जु ड़े ह, इंटरनेट क इस असु र ा ने उनक नींद हराम कर द ह। कई कंप नय का मानना ह क
उनके संगणक के योग के बना उनक जानकार अपरा धय ने ा त क ह। सरकार वभाग क
गोपनीय सू चनाएँ भी अब इन अपरा धय के पास ह। इस अपराध को रोकने के लए कई दे श को
सं ध करने पर ववश होना पड़ा ह। यू रोपीय प रषद क एक स म त ने एक सं ध मसौदे पर ह ता र
कए ह, िजस का उ ेशय साइबर अपराध क रोकथाम करना ह। इसके तहत इंटरनेट पर अ धक
भावी यव था करने, सु र ा उपाय बढ़ाने और साइबर अपरा धय क पहचान कर उ हे कडा दं ड दे ने
क यव था क गयी ह।
वष 2000 म संसद म आई॰ ट ॰ बल 2000 के नाम से वधेयक लाकर एक नया कानू न बनाया
गया ह । इसम सू चना तकनीक के े म ग त व धय , अंतरा य यापार , आई॰ट ॰ उपकरण के
आयात- नयात, बु नयाद ढ़ाचे के वकास और साइबर अपराध रोकने के उपाय के लए व तृत
ावधान कए गए ह। यह कानू न साइबर अपराध के मामले म अदालत और पु लस को एक ठोस
कानू नी ढाँचा दे ता ह। कोई भी नेटवक म वाइरस नह ं डाल सकेगा ।
आईबी साइबर अपराध क नकेल कसने के लए भारत समेत नौ ए शयाई दे श ने वष 2000 म
एक सहयोग समझोता कया क यह दे श ऑनलाइन नेटव कग शु करगे । इन अपराध क रोकथाम
के लए व व के सभी दे श के बीच सहयोग क आव यकता ह ।
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उपसंहार : इसी तरह, य द दु नया के अ य दे श भी सु र ा उपाय को मजबू त कर तथा नई तकनीक
का वकास करे तो इन अपराध पर भावी अंकुश लगाया जा सकता ह। इसे रोकने म इंटरपोल भी
मह वपू ण भू मका नभा सकता ह।
2) बेरोजगार क सम या
संकेत ब दु : 1) बेरोजगार क भयावह ि थ त, 2) बेरोजगार के कारण, 3) नवारण
भू मका : येक दे श क आ थक यव था का एक ह मु ख उ े य होता ह क उस दे श का येक
नाग रक अपनी आव य ताओं क पू त करते हु ए दे श क प रि थ तय के अनु सार रहन-सहन का
यू नतम तर ा त कर सके। इसके लए रोजगार पाना थम आव यकता ह। य द कसी को काम
करना है और उसे कोई यो य काय नह ं मले, तो दे श को आ थक हा न उठानी पड़ती ह। य द दे श
मांग के अनु सार रोजगार न पैदा कर सके तब तो भयावह ि थ त उ प न हो जाती ह।
वषय-व तु : भारत म बे रोजगार क सम या गंभीर पधारण कर चु क ह। भारत क आबाद सवा
सौ करोड़ से भी अ धक ह। यहाँ चु र मा ा म ाकृ तक संसाधन ह, 4 3 *7 8 कमी ह-संसाधन के
उपयोग क समु चत नी त क । हमारे यहाँ छपी हु ई बे रोजगार ह। कृ ष े से अ त र त यि त के
हटा दे ने से कृ ष े के उ पादन पर कोई भाव नह ं पड़ेगा।
बेरोजगार से आ थक नु कसान के साथ समाज म अ यव था भी फैलती ह। आए दन
अपहरण, फरौती, लू टपाट क घटनाएँ अखबार म छाई रहती ह। इस से समाज म असु र ा क
भावना घर कर जाती ह। बे रोजगार यु वक को समाज घृणा क नजर से दे खता ह, प रवार के लोग भी
उसे घृणा क नजर से ह दे खते ह।
बेरोजगार के अनेक कारण ह, जनसं या वृ , औ योगीकरण क धीमी ग त, दोषपू ण
णाल , नेताओं क गलत नी तयाँ। जनसं या के मामले म हम व व म दूसरे पायदान पर ह। कसी
जनसं या का आकार, संरचना और उसक सामािजक व सां कृ तक वशेषताएँ आ थक वकास क
ग त के मू ल नयामक त व ह। बड़े प रवार के कारण बचत कम होती ह, नवेश कम होता ह तथा
रोजगार के अवसर सी मत हो जाते ह।
सरकार क गलत नी तयाँ भी इसके लए िज़ मेवार ह, सरकार के अ धकतर नणय
अदूरद शतापू ण होते ह। वष 1962 के चीन आ मण के बाद सरकार ने बड़ी सं या म इंजी नय रंग
कॉलेज खोले। यु वा पढ़ - लख लए, पर रोजगार उपल ध नह ं हो सका। आज भी सरकार बना सोचे-
समझे तकनीक सं थाओं व व व व यालय खोलती जा रह ह, पर यो य रोजगार दे ने म असमथ ह।
बेरोजगार का एक मु य कारण यह भी ह - सरकार नौक रय के त अ धक आकषण। यु वक अपना
रोजगार करने क अपे ा सरकार नौक रय म जाना चाहते ह, वहाँ उ हे अ छ आमदनी मलने क
उ मीद ह।
उपसंहार : बेरोजगार के कारण चाहे कुछ भी हो, आज ज रत ह उसके समाधान क । योजना आयोग
व सरकारने इसे गंभीरता से लया ह तथा अनेक योजनाएँ ार भ क ह। सरकार कुट र उ योग को
बढ़ावा दे रह ह, ता क अ धक सं या म लोग को काम मल सके। इसके लए स ती दर पर पू ंजी
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दे ना का यास कया जा रहा ह। इसके अ त र त उ योग क थापना ,प रवार नयोजन जैसे यास
से भी इस गंभीर सम या पर नयं ण पाया जा सकता ह।
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दस संभा वत नबंध के वषय तथा उनके लेखन के संकेत ब दु
1) श ा का गरता तर :
* श ा का अथ,
* वतमान श ा,
* बौ क म को मह व,
* दोषी कौन?
2)भारत पाक संबंध:
* भारत पाक के ज टल संबंध,*पा क तान का इ तहास
* पा क तान क भारत व नी त
* पा क तान के ष यं
* भारत का शां त यास
3)मोबाइल फोन : कतना सु खद ? :
* मोबाइल फोन- एक सु वधा या संपि त,
* संपक का स ता और सु लभ साधन,
* वपि तयाँ - अनचाहा खलल डालने का साधन,
* अपरा धय के लए वरदान,
* न कष
4)इंटरनेट –सू चना ौ यो गक म ां त:
* तावना
* आरं भ
* इंटरनेट के मु य भाग
* लाभ , उपयोग , हा न
* उपसंहार
5)दे श क राजनी त म म हलाओं क सहभा गता :
* अंध व वास और अ ान से मु ि त पा चु क नार,
* अपने दा य व का नवाह करने म स म नार ,
* राजनी त म पु ष और नार क समान भागीदार पर वचार।
* म हलाओं क राजनै तक सहभा गता समय क मांग
6)ऊजा क बढ़ती मांग : सम या और समाधान :
* नए ोत क आव यकता,
* ऊजा के पारं पा रक ोत का समा त होना एक भयावह बात,
* हमार ऊजा पर नभरता
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7)यु वाओं म भटकाव :कारण और नवारण:
* दन ब दन भटकता यु वा वग,
* सामािजक, आ थक व नै तक मू य का अवमू यन,
* बेरोजगार , यु वाओं म भर नराशा , कुं ठा
* यु वाओं म सृजना मकता व रचना मकता का ास ,
* यु वा वग ह दे श के भावी कणधार ।
8)अ त र अनु संधान और हम:
* अ तर म भारतीय उप ह,*चं मा क या ा,
* भारत का मंगल अ भयान,
* नासा म भार तय क सहभा गता,
* उपसंहार
9)मनोरं जन का मह व :
* तावना,
* व वध कार,
* व थ मनोरं जन ह वा त वक,
* समयाव ध और मह व,
* उपसंहार ।
10) ा य जीवन:
* भू मका,
* गाँव का जीवन,
* कृ त से सहचय,*वतमान गाँव ग त क ओर,
* उपसंहार
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प -लेखन
प लेखन एक मह वपू ण कला ह। इसका यावहा रक प अ यंत सबल ह। यह कला जन-सामा य के
जन-जीवन से सु संबं धत ह।
प के दो कार ह 1)औपचा रक प – ाथना प , आवेदन प , शकायती प आ द।
2)अनौपचा रक प – बधाई प , शुभकामना प , ध यवाद प ।
औपचा रक प
1) कसी दै नक प के संपादक को प ल खए,िजसम सामा य नाग रक क क ठनाइय का वणन
कया गया ह ।
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सेवा म, दनांक :-
ीमान संपादक महोदय,
नवभारत टाइ स ,
बहादुर शाह जफ़र माग,
द ल ।
वषय: सामा य नाग रक क क ठनाइय से अवगत करना।
मा यवर,
मै ी॰अ॰ब॰स, आप के लोक य समाचार प के मा यम से संबि धत अ धका रय और सरकार
का यान सामा य नाग रक क क ठनाइय क ओर आक षत करना चाहता हू ँ।
म द ल के बापा नगर का नवासी हू ँ। हमार यह कॉलोनी नई बनी है। नए लैट म अ धकतर
प रवार आ गए ह, ले कन सु वधाएं नाम-मा क भी नह ं ह। यहाँ कोई पाक नह ं ह, सड़क टू ट -फूट
ह। ना लय म गंदा पानी भरा रहता ह। चार तरफ गंदगी के ढ़े र पड़े हु ए ह। म छर, मा खयाँ, चू हे तो
भरे पड़े ह। यहाँ आने के लए नाग रक बहु त स न थे, ले कन जब से यहाँ आए ह, चार ओर
परे शा नयाँ ह है। पीने के लए व छ जल क आपू त नह ं ह। बजल भी बार-बार चल जाती ह।
लोग को लगता ह क वे नरक म नवास करते ह। म इस संबंध म सरकार तथा उसके अ धका रय
से ाथना करना चाहता हू ँ क वे इस दशा म उ चत कदम उठाएँ, ता क लोग चैन से रह सके।
आशा ह क आप मेरे वचार को अपने स समाचार-प म का शत कर के अनु ग ृह त करगे।
ध यवाद स हत
भवद य,
अ॰ब॰स॰
5/4, बापा नगर, नई द ल ।
...............................................................................................................................................
वषय:अपराध क रोकथाम के लए प ।
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महोदय,
मै, ी॰कृ ण गोपाल, गांधी नगर का नवासी, अ यंत खेद के साथ लख रहा हू ँ क हमार कॉलोनी,
िजसक शां त यता पर हम सबको नाज़ था, आजकल अपरा धय का बोलबाला ह। म हलाएँ तो घर
से बाहर नकालने म कतराती ह। अभी कुछ ह दन पहले एक म हला के गले से बदमाश ने चेन
झपट ल , एक लड़क का पस छ न लया। राह चलती लड़ कय को छे ड़ना तो आम बात हो गयी ह।
परस ह एक आभू षण क दुकान को लूट लया गया, जब बदमाश का मुक़ाबला करने क को शश
क गयी तो सरे आम बीच बाजार म गोल मार कर उनक ह या कर द गयी। इसी कारण हर
यि त अपनी तथा अपने प रवार क सु र ा को लेकर चि तत ह।
अत: आप से वन नवेदन है क हमार कॉलोनी म उ चत सु र ा का बंध करके पु लस क ग त
बढ़ाए और तेजी से बढ़ते हु ए अपराध क रोकथाम कर।
ध यवाद स हत।
भवद य,
ी॰कृ ण गोपाल॰
5/4 ,गांधी नगर,
नई द ल ।
अनौपचा रक प
प 1) अपने बड़े भाई को प ल खए, िजसम उनके वारा द ग सीख पर आचरण करने का
आ वासन दया गया हो।
पर ा भवन,
नई मु ंबई ।
दनांक : -
पू य भाई साहब,
सादर नम कार,
आप का नेह भरा प मला। आपने और भाभीजी ने मेरा आ मबल बढ़ाते हु ए छा ावास म
रहते हु ए यानपू वक पढ़ने, अ यापक के त ा, सहपा ठय से मधु र यवहार तथा बड़ का आदर
करने क सीख द ह। प पढ़कर आप दोन के त मेरे दल म ा और आदर के भाव और अ धक
बढ़ गए ह। माता- पता के बाद आप ह दोन मेरे माता- पता ह।
भाईसाहब, िजन आकां ा और उ साह के साथ आपने मु झे छा ावास के लए भेजा ह, उसे पू ण
करने म कोई कसर नह ं छोड़ू ँगा। दन-रात एक करके एका च त होकर अ ययन क ं गा।
आव यकतानु सार कुशा -बु छा से म ता कर, उनके बु -बल का लाभ उठाकर और पू य
अ यापक के माग-दशन से थम आने का य न क ं गा।
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अत: म आप को व वास दलाना चाहू ँगा क मेरे कसी भी काय से आप के मन को ठे स नह ं
पहु ंचेगी और म आपक आकां ाओं पर खरा उत ँ गा। मेर तरफ़ से भाभीजी को चरण पश और न ह
अंकुर को ढ़े र सारा यार।
आपका अनु ज,
कृ णगोपाल।
........................................................................................................................................
प 2) पता क ओर से प लखकर पु को धू पान छोड़ने क सलाह द िजए।
पर ा भवन,
नई द ल ।
दनांक : -
य पु पंकज,
चरं जीव रह ,
घर म सब कुशलपू वक ह और आशा करता हू ँ क छा ावास म तु म भी कुशलतापू वक ह गे और
अपनी वा षक पर ा क तैया रय म एका च त लगे ह गे।
बेटा, कल तु हारे सहपाठ का भाई मला था और बात ह बात म धू पान पर बात चल, तो उसने
बताया क आज कल तु म भी धू पान करने लगे ह । पहले तो मुझे व वास ह नह ं हु आ क तुम
यसन करने लगे ह , पर जब उसने बताया क उसने अपनी आख से तु ह धू पान करते दे खा ह, तो
मेरा मन तु हारे त चि तत हो उठा।
बेटा, धू पान वा थ के लए हा नकारक ह, िजसके सेवन से खांसी, ट ॰बी, फेफड़ क खराबी तथा
कसर जैसे असा य रोग भी हो सकते ह। जब उसका धु आं दमाग म पहु ँचता ह, तो छा नशे का
आद हो जाता ह, तब फर शराब क लत लग जाती ह। इस लए तु म धू पान छोड़कर आपने मन
पर नयं ण रखो, योगा यास का सहारा ल , ऐसे म से दूर रह । शि तवधक, संतु लत आहार का
सेवक करो। अगर इस के बारे म तु हारे छोटे भाई को पता चला तो वह भी इसका अनु करण करे गा,
तो या तु ह अ छा लगेगा ?
आपने वा थ का यान रखना। मेर शुभकामनाएँ और आशीवाद तु हारे साथ ह।
तु हारा पता,
क॰ख॰ग॰
...............................................................................................................................................
अ यास हे तु पाँच संभा वत प के वषय।
1) अपने व यालय के ाचाय को एक प ल खए, िजस म आपके सहपाठ के साह सक काय के
लए उसे स मा नत करने का अनु रोध हो।
2) समय के सदुपयोग और प र म पर बल दे ते हु ए अपने छोटे भाई को एक ेरणादायक प लखे।
71
3) आप एक सजग नाग रक ह, आपके े म पेड़ क कटाई हो रह है, इसे रोकने के लए
िजला धकार को एक प लखे।
4) कसी कंपनी के लक के र त पद क पू त के लए आवेदन प लखे।
5) आप क य व यालय,आर॰ के॰ पु रम,नई द ल ,के छा ह। आप का नाम पंकज खरे ह। आप
अपने व यालय के धानाचाय को आ थक सहायता दान करने हे तु प ल खए ।
...............................................................................................................................................
व ापन लेखन
व ापन का अथ है सू चना का चार अथवा सार करना सरकार या अ य सामािजक सं थाएं अपनी
सू चनाओं को व ापन के मा यम से सा रत करती ह । यापार और उ योक जगत , समाचार प
दूरदशन और इंटरनेट सब जगह व ापनो का ह बोल - बाला ह ।
े ठ व ापन के ल ण
1. उसमे मू ल वषय व तु का ह चार सार होना चा हए |
2. संदेश बहु त प ट होना चा हए |
3. भाषा सं त और रोचक होनी चा हए ।
4. व ापन म कोई आपि त जनक या भटकाव क बात नह ं होनी चा हए |
5. िजसका व ापन कया जा रहा है उसका उ लेख बार – बार होना चा हए |
उदाहरण -1
तन क दुग ध हटाए
वचा को व थ बनाए
खु जल से रखे कोसो दूर
तन और मन दोन रह सदा म त
तो आइए दे र मत क िजए नीम साबु न के लए,
केवल पए म 10
एक साबु न के साथ एक साबु न 9850269923पर संपक क िजए I
:
72
उदाहरण 2-
आपके शहर म जल बचाओं पर काय म आयोिजत कया जा रहा है –इस आयोजन पर एक व ापन
तैयार क िजएI
उदाहरण – 3 आपके कालोनी म एक व यालय खुल रहा है –इस पर एक व ापन तैयार क िजए-
आदश वदयालय –
आपक कालोनी सेवा नगर म खु ल रहा है जहाँ पढ़ाई के साथ वे -
सार सु वधाएँ उपल ध है िजससे आपका शार रक एवं मान सक वकास होगा -
अनु भव क पहचान करके सीखो ान
तो दे र कस बात क ज द क िजए आज ह खुला है वेश Iल िजये
73
उदाहरण –4 “पयावरण बचाओ” पर एक व ापन तैयार क िजएI
पयावरण से धरती
और धरती से हम,
धरती को ह रत बनाए
यादा से यादा पेड़ लगाएI
काटो नह ं पहाड़ को
धरती रह पु कार
पयावरण कवच है
हो मेर पु कार I
- आज ह पधार
गु ीत साइकल टोर
543 मु य बाजार , द ल | दूरभाष : 09487699757
74
ाय: पू छे जाने वाले न ( न कोश)
1. नगरपा लका के या – या काय होते ह ? पाठ म ऐसा य कहा गया है क नगरपा लका थी तो
कुछ – न – कुछ करती भी रहती थी ?
11. नवाब साहब ने खीरे को य न से काटकर अ त म सू ंघकर खड़क से बाहर य फेक दया ?
12. लेखक ने नवाब साहब के भाव प रवतन के कारण का अनु मान कैसे लगाया ?
20. लेखक फादर क बाह का दबाव अपनी छाती पर कैसे महसू स कर रहा ह ?
75
21. म नू भ डार ने अपने यि त व के बारे मे बताते समय अपने पता के वभाव का उ लेख य
कया ?
29. कुलसु म क कड़ाह म छनती कचौ ड़याँ बि म ला खाँ को संगीतमय य लगती थीं ?
31. उधो वारा दये गए योग के संदेश ने गो पय क वरह क आग म घी का काम कैसे कया ?
37. गो पय ने कृ ण म कौन कौन से प रवतन दे ख िजसके कारण वे अपना मन वापस लेना चाहती
ह?
40. गो पय ने अपनी वाणी क चतु राई से कस कार ानी उधो को हरा दया ?
41. धनु ष तोड़ने वाले को परशु राम सह बाहु के समान अपना श ु य मानते ह?
76
42. आपक ि ट से परशुराम का ोध उ चत है अनु चत तक स हत लख ।
56. आपके वचार से माँ ने ऐसा य कहा क “लड़क होना पर लड़क जैसा दखाई मत दे ना” ?
61. क वता संगतकार के आधार पर प ट क िजए क सफलता के चरम शखर पर पहु ँचने वाले
लड़खड़ाते कदम को संगतकार कस कार सहयोग दान करता है ?
62. तभावन होते हु ए भी संगतकार जैसे लोग अपने को शीष पर य नह ं रखना चाहते ?
77
64. भोलानाथ और उसके सा थय के खेल और खेलने क सामा ी आपके खेल और उसक सामा ी
से कैसे भ न है ?
65. ‘ माता का आँचल ’ कहानी पढ़ते समय आपको अपनी माता - पता का ेम कस कार याद
होता है ?
याकरण
3. कल हमने ताजमहल दे खा |
4. यह व यालय हमारा है ।
5. सफलता प र म से मलती है ।
12. मजदूर मेहनत करता है ले कन उसे उसका लाभ नह ं मलता | (रचना के आधार पर वा य )
17. कम रोशनी म पढ़ने के कारण व याथ अपनी आंखे गवा बैठा | (संयु त वा य म बदले )
79
11- म लख रहा हू ँ । [वा य का नाम लख]
*******************************************************************
80
न – प ा प BLUE PRINT क ा – दसवीं (10) कोड 002 - अ
4 वा य 2(2) 2(2) 04
पा ठत गदयांश पर
7 2(2) 2(2) 1(1) 05
आधा रत न
पदयांश पर अथ
9 2(2) 2(2) 1(1) 05
हण के न
पू रक पु ि तका
11 4(1) 04
(मू यपरक)
कुलभार: 11 14 2 13 14 9 5 2 10 80
81
आदश नप 2018 - 2019
वषय : ह द क ा :दसवीं समय :3.00 घंटे पू णाक :80
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------
नदश – (क) इस न-प म चार खंड ह |
(ख) सभी ख ड के न के उ तर दे ने अ नवाय ह,उ तर यथा संभव मानु सार द |
(ग) लेख सु ंदर एवं सु प ट हो,वतनी का उ चत यान रख |
“ख ड -क”
न :-1) न न ल खत गदयांश को यान से पढ़कर नीचे दये गए न उ तर ल खए |
जब मनु य सोया रहता है ,वह क लयु ग म होता है I जब वह बैठ जाता है ,तब वापर म होता है I
जब वह उठ खड़ा होता है ,तब ेता म होता है और जब चलने लगता है, तो सतयु ग म पहु ँच जाता
है I इसी लए बार – बार कहा गया है क चलते रहो I जीवन चलने और आगे बढ़ने का नाम है I
पयटन भी तो चलने , नरं तर आगे बढ़ने और नत नई खोज करने क या हैI पयटन अपने आप
म योग साधना भी है –यम, आसन, ाणायाम, याहार, धारणा, यान और समा ध I पतंज ल ने
योग के आठ अंग बताएं ह I ये सभी पयटन म सि म लत ह I पयटन का आर भ होता है ,शार रक
काम से I हमारे दे श म पयटन मा यम है – एकता के सू म परोने क को शश का I अनेकता म
एकता क थापना हे तु मं दर, मि जद, गरजाघर, गु वारे, दरगाह सभी धम के लोग को एक सू
म बांधते ह I दे श के चार कोन म आ द शंकराचाय वारा था पत चार मठ धम के मा यम से दे श
को जोड़ते ह I
(1) ‘बार –बार चलते रहो’ य कहा गया है ? (2)
(2) पतंज ल ने योग के कतने अंग बताए ह ? क ह चार के नाम लख I (2)
(3) एकता म अनेकता क थापना कौन करते ह ? (2)
(4) पयटन क तु लना कस साधना से क गई है ? (1)
(5) धम के मा यम से दे श को कौन जोड़ते ह ? (1)
“ख ड – ख ”
न 3:- नदशानु सार उ तर द - (1x3=3)
(i) रचना के आधार पर वा य के कतने भेद होते ह ? नाम लख I
(ii) जो लोग ई या करते ह ,मु झे पसंद नह ं I (सरल वा य म बदल )
(iii) कहानी मज़ेदार और दलच प थी I (म वा य म बद लए)
“खंड-ग ”
न (7) :- न न ल खत ग यांश को यान से पढ़कर नीचे दये गए न के उ तर ल खए-
फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सु नने जैसा है I उनको दे खना क णा के नमल जल
म नान करने जैसा था और उनसे बात करना कम के संक प से भरना था I मु झे ‘प रमल’के वे दन
याद आते ह जब हम सब एक पा रवा रक र ते म बंधे जैसे थे, िजसके बड़े फ़ादर बु के थे I हमारे
हंसी–मज़ाक म वे न ल त शा मल रहते, हमार गोि ठय म वे गंभीर बहस करते I हमार रचनाओं पर
बेबाक राय दे ते और हमारे सं कार और उ सव म वे बड़े भाई और पुरो हत क तरह खड़े होकर हम
आशीष से भर दे ते I
83
(i) लेखक क ि ट म फ़ादर को याद करना, उ ह दे खना और उनसे बात करना कन अनु भव के
समान था ? (2)
(ii) लेखक को प रमल के दन के कौन से घटना म याद आते ह ? (2)
(iii) घर के उ सव म फ़ादर क या भू मका होती थी ? (1)
न 8 :- न न ल खत न के सं त उ तर लख I (2X4=8)
(i) बालगो बन भगत को गृह थ और स यासी य कहा गया ?
(ii) कै टन कौन था और उसे या बात आहत करती थी ?
(iii) ले खका म नू भंडार अपने पताजी क कस वरोधाभासी वृ त पर वचार करती है ?
(iv) सु षर वा य से या अ भ ाय है ? शहनाई को सु षर वा य म शाह क उपा ध य द गई
होगी ?
न (9) :- न न ल खत प ठत पदयांश को यान से पढ़कर न के सं प
े उ तर ल खए-
यश है या ना वैभव है , मां है ना सरमाया ;
िजतना ह दौड़ा तू उतना ह भरमाया I
भु ता का शरण – ब ब केवल मृगतृ णा है ,
हर चि का म छपी एक रात कृ णा है I
जो है यथाथ क ठन उसका तू कर पू जन ,
छाया मत छूना मन, होगा दुःख दूना I
(i) मृगतृ णा से क व का या अ भ ाय है , यहाँ मृगतृ णा कसे कहा गया है ? (2)
(ii) छाया श द से क व का या ता पय है ? (2)
(iii) ‘हर चि का म छुपी एक रात कृ णा है ’-पंि त से क व कस त य से अवगत करवाना
चाहता है ? (1)
न-11 माता का आँचल शीषक क उपयु तता बताते हु ए कोई अ य शीषक समझाइए।
अथवा
‘नाक’ मान स मान व त ठा का योतक है| यह बात पू र यं य रचना म कस तरह उभरकर आई
है? (4)
84
“खंड- घ”
न:-12 दए गए संकेत- ब दुओं के आधार पर कसी एक वषय पर लगभग 200 से 250 श द म
नबंध ल खए – (10)
(क) पवतीय सौ दय :
संकेत बंद–ु भू मका, मानव ेम, मानव के चहु ंमु खी वकास म सहायक , संर ण के त
जनता के कत य , सौ दय को बचाये रखने के उपाय, उपसंहार
(ख) इंटरनेट का भाव :
संकेत बंद ु – भू मका, इ तहास और वकास , इंटरनेट संपक, इंटरनेट सेवाएं, भारत म इंटरनेट,
भव य क दशाएं, उपसंहार |
(ग) यायाम और वा य
संकेत बंद ु – भू मका, अथ, व थ शर र म व थ मन का नवास, यायाम से शर र तथा
मन पर नयं ण के मता का वकास, अनेक कार के यायाम और इनके लाभ ,उपसंहार I
(घ) मेरे जीवन का आदश :
संकेत बंद ु – भू मका, आदश कौन, शै क उपलि धयां, जीवन क सफलताएँ, ेरणा का ोत,
उपसंहार I
*****************************************************************************
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87
88
89
90
91
SET-1
Series JMS/2 H$moS> Z§.
Code No. 3/2/1
amob Z§. narjmWu H$moS >H$mo CÎma-nwpñVH$m Ho$ _wI-n¥ð
Roll No.
>na Adí` {bIo§ &
{hÝXr
HINDI
(nmR²>`H«$_ A)
(Course A)
gm_mÝ` {ZX}e :
(i) Bg àíZ-nÌ _| Mma IÊS> h¢ – H$, I, J Am¡a K &
(ii) Mmam| IÊS>m| Ho$ àíZm| Ho$ CÎma XoZm A{Zdm`© h¡ &
(iii) `Wmg§^d àË`oH$ IÊS> Ho$ CÎma H«$_e… Xr{OE &
3/2/1 1 P.T.O.
IÊS>> H$
1. {ZåZ{b{IV JÚm§e H$mo Ü`mZnyd©H$ n{‹T>E Am¡a nyN>o JE àíZm| Ho$ CÎma {b{IE :
Xme©{ZH$ AañVy Zo H$hm h¡ ‘‘àË`oH$ ì`{º$ H$mo C{MV g_` na, C{MV ì`{º$ go,
C{MV _mÌm _|, C{MV CÔoí` Ho$ {bE, C{MV T>§J go ì`dhma H$aZm Mm{hE &’’ dmñVd _|
àË`oH$ àmUr H$m g§~§Y EH$-EH$ jU go ahVm h¡, {H$ÝVw ì`{º$ CgH$m _hÎd Zht g_PVm &
A{YH$Va ì`{º$ gmoMVo h¢ {H$ H$moB© AÀN>m g_` AmEJm Vmo H$m_ H$a|Jo & Bg Xþþ{dYm Am¡a
CYo‹S>~wZ _| do OrdZ Ho$ AZoH$ A_yë` jUm| H$mo Imo XoVo h¢ & {H$gr ì`{º$ H$mo {~Zm
hmW-nm±d {hbmE g§gma H$s ~hþV ~‹S>r gån{Îm N>ßna \$m‹S>H$a H$^r Zht {_bVr & g_` CÝht
Ho$ aW Ho$ Kmo‹S>m| H$mo hm±H$Vm h¡, Omo ^m½` Ho$ ^amogo ~¡R>Zm nm¡éf H$m An_mZ g_PVo h¢ & Omo
ì`{º$ l_ Am¡a g_` H$m nmaIr hmoVm h¡, bú_r ^r Cgr H$m daU H$aVr h¡ & g_` H$s
H$s_V Z nhMmZZo dmbo g_` ~rV OmZo na {ga YwZVo ah OmVo h¢ & g_` {Za§Va J{V_mZ h¡ &
Bg{bE h_| g_` H$m _yë` g_PZm Mm{hE & gmW hr g_`mZwgma H$m_ ^r H$aZm Mm{hE &
g\$b OrdZ H$s `hr Hw§$Or h¡ &
(H$) OrdZ Ho$ A_yë` jUm| H$mo {H$g àH$ma Ho$ ì`{º$ Imo XoVo h¢ ? 2
(I) ^m½` Ho$ ^amogo ~¡R>Zm nm¡éf H$m An_mZ Š`m| H$hm J`m h¡ ? 2
(J) Xme©{ZH$ AañVy Ho$ H$WZ H$m Ame` {b{IE & $2
(K) bú_r {H$go àmßV hmoVr h¡ ? 1
(L>) Cn`w©º$ JÚm§e Ho$ {bE Cn`wº$ erf©H$ {b{IE & $1
2. {ZåZ{b{IV H$mì`m§e H$mo Ü`mZnyd©H$ n{‹T>E Am¡a nyN>o JE àíZm| Ho$ CÎma {b{IE :
~hþV KwQ>Z h¡ ~§X Kam| _|, Iwbr hdm Vmo AmZo Xmo,
g§e` H$s {I‹S>{H$`m± Imob, {H$aZm| H$mo _wñH$mZo Xmo &
D±$Mo-D±$Mo ^dZ CR> aho, na Am±JZ H$m Zm_ Zht,
M_H$-X_H$, Amnm-Ymnr h¡, na OrdZ H$m Zm_ Zht
bm¡Q> Z OmE gy`© Ûma go, Z`m g§Xoem bmZo Xmo &
ha _m± AnZm am_ OmohVr, H$Q>Vm Š`m| dZdmg Zht
_ohZV H$s grVm ^r ^yIr, éH$Vm Š`m| Cndmg Zht &
~m~m H$s gyZr Am±Im| _| Mw^Vm {V{_a ^mJZo Xmo &
ha CXmg amIr JwhmaVr, ^mB© H$m dh ß`ma H$hm± ?
S>ao-S>ao [aíVo ^r H$hVo, AnZm| H$m g§gma H$hm± ?
Jw_gw_ J{b`m| H$mo {_bZo Xmo, ˜we~y Vmo {~IamZo Xmo &
3/2/1 2
(H$) ‘D±$Mo-D±$Mo ^dZ CR> aho, na Am±JZ H$m Zm_ Zht’ n§{º$ H$m Ame` ñnîQ>
H$s{OE & 2
(I) gy`© Ûma go hr Š`m| bm¡Q> OmEJm ? 2
(J) AmO [aíVm| Ho$ S>ao-S>ao hmoZo H$m H$maU Amn Š`m _mZVo h¢ ? 1
(K) ‘{V{_a’ eãX H$m AW© {b{IE & 1
(L>) H${d Zo Š`m g§Xoe {X`m h¡ ? $ 1
AWdm
_oam _m±Pr _wPgo H$hVm ahVm Wm
{~Zm ~mV Vw_ Zht {H$gr go Q>H$amZm &
na Omo ~ma-~ma ~mYm ~Z Ho$ AmE±,
CZHo$ {ga H$mo dht Hw$Mb H$a ~‹T> OmZm &
OmZ~yP H$a Omo _oao nW _| AmVr h¢,
^dgmJa H$s MbVr-{\$aVr MÅ>mZ| &
_¢ BZgo {OVZm hr ~MH$a MbVm hÿ±,
CVZr hr {_bVr h¢, `o J«rdm VmZo &
aI AnZr nVdma, Hw$Xmbr H$mo boH$a
V~ _¢ BZH$m CÞV ^mb PwH$mVm hÿ± &
amh ~ZmH$a Zmd M‹T>mE OmVm hÿ±,
OrdZ H$s Z¡`m H$m MVwa {Id¡`m _¢
^dgmJa _| Zmd ~‹T>mE OmVm hÿ± &
(H$) amh _| AmZo dmbr ~mYmAm| Ho$ gmW H${d H¡$gm ì`dhma H$aVm h¡ ? 2
(I) H${d Zo h_| Š`m àoaUm Xr h¡ ? ñnîQ> H$s{OE & 2
(J) H${d Zo AnZm _m±Pr {H$go H$hm h¡ ? 1
(L>) ‘OrdZ H$s Z¡`m H$m MVwa {Id¡`m’ {H$go H$hm J`m h¡ ? $ 1
3/2/1 3 P.T.O.
IÊS> I
3. {ZåZ{b{IV _| go {H$Ýht VrZ H$m {ZX}emZwgma CÎma {b{IE : 13=3
(H$) _wPo AnZr nËZr Am¡a nwÌ H$s _¥Ë`w Ho$ gmW hr µ\$mXa Ho$ eãXm| go PaVr em§{V ^r
`mX Am ahr h¡ & (g§`wº$ dmŠ` _| ~X{bE)
(I) amV hþB© Am¡a AmH$me _| Vmam| Ho$ Ag§»` Xrn Ob CR>o & (gab dmŠ` _| ~X{bE)
(J) _m± Zo H$hm {H$ em_ H$mo OëXr Ka Am OmZm & (aoIm§{H$V CndmŠ` H$m ^oX {b{IE)
(K) nmZ dmbo Ho$ {bE `h _µOoXma ~mV Wr bo{H$Z hmbXma gmh~ Ho$ {bE M{H$V H$a XoZo
dmbr & ({_l dmŠ` _| ~X{bE)
4. {ZåZ{b{IV _| go {H$Ýht Mma dmŠ`m| H$m {ZX}emZwgma dmÀ` n[adV©Z H$s{OE : 14=4
(H$) hmbXma gmh~ Zo nmZ Im`m & (H$_©dmÀ` _| ~X{bE)
(I) XmXm Or à{V{XZ nmH©$ _| Q>hbVo h¢ & (^mddmÀ` _| ~X{bE)
(J) Jm§Yr Or Ûmam {díd H$mo gË` Am¡a Aqhgm H$m g§Xoe {X`m J`m &
(H$V¥©dmÀ` _| ~X{bE)
(K) nmZ H$ht AmJo Im b|Jo & (H$_©dmÀ` _| ~X{bE)
(L>) {Ibm‹S>r Xm¡‹S> Zht gH$m & (^mddmÀ` _| ~X{bE)
5. {ZåZ{b{IV dmŠ`m| _| go {H$Ýht Mma aoIm§{H$V nXm| H$m nX-n[aM` {b{IE : 14=4
(H$) gwa{^ {dÚmb` go A^r-A^r AmB© h¡ &
(I) CgZo _oar ~mV| Ü`mZnyd©H$ gwZr &
(J) em~me ! Vw_Zo ~hþV AÀN>m H$m_ {H$`m &
(K) dhm± Xg N>mÌ ~¡R>o h¢ &
(L>) n[al_ Ho$ {~Zm g\$bVm Zht {_bVr &
6. {ZåZ{b{IV _| go {H$Ýht Mma àíZm| Ho$ CÎma Xr{OE : 14=4
(H$) ‘^`mZH$ ag’ H$m EH$ CXmhaU {b{IE &
(I) {ZåZ{b{IV H$mì`-n§{º$`m| _| ag nhMmZ H$a {b{IE :
VZH$a ^mbm `y± ~mob CR>m
amUm ! _wPH$mo {dlm_ Z Xo &
_wPH$mo d¡ar go öX`-jmo^
Vy V{ZH$ _wPo Amam_ Z Xo &
(J) ‘OwJwßgm’ {H$g ag H$m ñWm`r ^md h¡ ?
(K) ‘em§V’ ag H$m ñWm`r ^md Š`m h¡ ?
(L>) {H$g ag H$mo ‘agamO’ ^r H$hm OmVm h¡ ?
3/2/1 4
IÊS> J
7. {ZåZ{b{IV JÚm§e H$mo Ü`mZnyd©H$ n‹T>H$a nyN>o JE àíZm| Ho$ CÎma {b{IE :
{nVm Ho$ R>rH$ {dnarV Wt h_mar ~on‹T>r-{bIr _m± & YaVr go Hw$N> µÁ`mXm hr Y¡`© Am¡a
ghZe{º$ Wr em`X CZ_| & {nVm Or H$s ha µÁ`mXVr H$mo AnZm àmß` Am¡a ~ƒm| H$s ha
C{MV-AZw{MV µ\$a_mBe Am¡a {µOX H$mo AnZm µ\$µO© g_PH$a ~‹S>o ghO ^md go ñdrH$ma H$aVr
Wt do & CÝhm|Zo qµOXJr ^a AnZo {bE Hw$N> _m±Jm Zht, Mmhm Zht... Ho$db {X`m hr {X`m &
h_ ^mB©-~{hZm| H$m gmam bJmd (em`X ghmZw^y{V go CnOm) _m± Ho$ gmW Wm bo{H$Z {Zhm`V
Aghm` _O~yar _| {bnQ>m CZH$m `h Ë`mJ H$^r _oam AmXe© Zht ~Z gH$m... Z CZH$m
Ë`mJ, Z CZH$s g{hîUwVm &
(H$) _m± H$s Cn_m YaVr go Š`m| H$s JB© h¡ ? 2
(I) bo{IH$m H$mo _m± H$m H$m¡Z-gm ê$n AÀN>m Zht bJVm Wm ? Š`m| ? 2
(J) bo{IH$m Am¡a CgHo$ ^mB©-~{hZm| H$s ghmZw^y{V {H$gHo$ gmW Wr ? 1
8. {ZåZ{b{IV _| go {H$Ýht Mma àíZm| Ho$ CÎma g§jon _| {b{IE : 2 4=8
(H$) ~mbJmo{~Z ^JV Ho$ ì`{º$Ëd H$s Xmo {deofVmE± {b{IE &
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9. {ZåZ{b{IV H$mì`m§e H$mo Ü`mZnyd©H$ n‹T>H$a nyN>o JE àíZm| Ho$ CÎma {b{IE$ :
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3/2/1 5 P.T.O.
10. {ZåZ{b{IV _| go {H$Ýht Mma àíZm| Ho$ CÎma g§jon _| {b{IE : 2 4=8
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{MÌU {H$`m h¡, Cgo AnZo eãXm| _| {b{IE & 4
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AmnHo$ {nVmOr AnZr nwamZr H$ma ~oMZm MmhVo h¢ & BgHo$ {bE nyam {ddaU XoVo hþE EH$
{dkmnZ H$m AmboI bJ^J 50 eãXm| _| V¡`ma H$s{OE &
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