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शिक्षा की संकल्पना/ अवधारणा
( CONCEPT OF EDUCATION)
By. Shiv Kumar Yadav
Asst. Professor, HNBPG
Collage , Pratapgarh ,UP
Email: shivkumaryadavedu@gmail.com
शिक्षा की अवधारणा
 शिक्षा की व्युत्पन्निास्त्रीय (Etymological )अवधारणा एवं
अर्थ
 शिक्षा की प्राचीन भारतीय एवं पाश्चात्य अवधारणा एवं
अर्थ
 शिक्षा की आधुननक अवधारणा एवं अर्थ
 शिक्षा का संक
ु चचत एवं व्यापक अर्थ
शिक्षा की व्युत्पन्निास्त्रीय (Etymological )अवधारणा एवं
अर्थ
 संस्त्कृ त भाषा क
े संदभथ में
 लैटिन भाषा क
े संदभथ में
व्युत्पन्निास्त्रीय अवधारणा एवं अर्थ
संस्त्कृ त भाषा क
े संदभथ में
 संस्त्कृ त भाषा क
े “शिक्ष्” धातु में “अ” प्रत्यय लगने से
शिक्षा िब्द की उत्पत्ति हुयी है ।
“शिक्ष्”
धातु
“अ”
प्रत्यय
शिक्षा
व्युत्पन्निास्त्रीय अवधारणा एवं अर्थ
लैटिन भाषा क
े संदभथ में
“Education” िब्द ननम्नशलखित तीन लैटिन िब्दों से
व्युत्पन्न माना जाता है ।
Latin terms / words meaning
Educatum
To Train,To act of teaching
and training
( शिक्षक्षत एवं प्रशिक्षक्षत
करना )
Educare To Educate,To Bring Up, To
Lead Out (त्तवकशसत
करना/आगे बढ़ाना )
Educere To lead out, To draw out
( त्तवकशसत करना /बाहर
ननकालना
व्युत्पन्निास्त्रीय अवधारणा एवं अर्थ
“Educatum” िब्द दो लैटिन िब्दों “E” (ए) तर्ा
“Duco”(ड्यूको) से उत्पन्न माना जाता है ।
अंदर से बाहर लाना/ आगे बढ़ाना
अर्ाथत् मानव की अंतर्नथहहत िक्ततयों का सवाांगीण
ववकास करना ही शिक्षा है।
“E”
( from
inner/
out of )
“Duco”
( To
Lead)
Educatum
शिक्षा की प्राचीन भारतीय अवधारणा एवं अर्थ
 वेदों क
े अनुसार – वेद िब्द की उत्पत्ति संस्त्कृ त भाषा क
े
“ववद्” धातु में “अ” प्रत्यय लगने से हुयी है।
प्राचीन भारत में त्तवद्या शिक्षा की पयाथय र्ी
त्तवद्या का अर्थ अज्ञान से मुक्तत /सत्य – असत्य में
त्तववेकपूणथ भेद करना र्ा ।
 िंकराचायथ जी क
े अनुसार “सा त्तवद्या या त्तवमुततये”
अर्ाथत् त्तवद्या वह है जो मानव को अज्ञान से/
कटिनाइयों से मुक्तत प्रदान करे।
“अ”
प्रत्यय
त्तवद्या
“त्तवद्”
धातु
शिक्षा की प्राचीन भारतीय अवधारणा एवं अर्थ
 उपर्नषद् क
े अनुसार -“त्तवद्या अमृतमश्नुते” (अमृतम्
+ अश्नुते)
अर्ाथत् त्तवद्या से अमृत शमलता है ।
उपर्नषदीय ववद्या-
 परा त्तवद्या आध्याक्त्मक ज्ञान
 अपरा त्तवद्या सांसाररक ज्ञान
 उपननषद् क
े अनुसार शिक्षा मोक्ष प्राक्तत का साधन है
।
 “ज्ञान वह है जो मनुष्य को सभी बंधनों से मुक्तत
टदलाए” ।
( Education is something which liberates man from all
शिक्षा की प्राचीन भारतीय अवधारणा एवं अर्थ
 गीता क
े अनुसार-
 “ऋते ज्ञानान्न मुक्तत:” अर्ाथत् ज्ञान क
े बबना मुक्तत नह ं
शमलती है ।
 “नटह ज्ञानेन सदृिम पत्तवरशमह त्तवद्यते” अर्ाथत् ज्ञान क
े
समान क
ु छ भी पत्तवर नह ं है।
इस प्रकार वेदों , उपननषदों और लगभग सभी भारतीय
दिथनों क
े अनुसार त्तवद्या / ज्ञान / शिक्षा वह है जो सत्य-
असत्य में भेद कराये, संसार क
े सभी बंधनों से मुक्तत प्रदान
कर मोक्ष की प्राक्तत कराये ।
भारतीय संस्त्कृ र्त में शिक्षा को मनुष्य का तीसरा नेर कहा गया
है– तृतीयं मनुष्यस्त्य नेरम् ।
“ककं न साधयनत कल्पलतेव त्तवद्या” अर्ाथत् त्तवद्या
कल्पलता क
े समान है जो सभी चीजों की पूनतथ करती है।
शिक्षा की प्राचीन पाश्चात्य अवधारणा एवं अर्थ
 सुकरात क
े अनुसार - शिक्षा का तात्पयथ संसार क
े उन
सवथमान्य त्तवचारों को प्रकि करने से है जो प्रत्येक
व्यक्तत क
े मक्स्त्तष्क में ननटहत है ।
( Education means bringing out of the ideas of
universal validity which are latent in the mind of
every man.- Socrates)
 तलेिो क
े अनुसार - शिक्षा व्यक्तत क
े िर र तर्ा आत्मा
में ननटहत उस समस्त्त सौंदयथ और पूणथता को त्तवकशसत
करती है क्जसकी उसमें क्षमता है।
( Education develops in the body and in the soul of
the pupil, all the beauty and all the perfection of
which he is capable.- Plato)
शिक्षा की प्राचीन पाश्चात्य अवधारणा एवं अर्थ
 अरस्त्तु क
े अनुसार - शिक्षा व्यक्तत की योग्यता का और
त्तविेष रूप से मानशसक योग्यता का त्तवकास करती है
क्जससे कक वह परम सत्य, शिव और सुंदर क
े चचंतन
का आनंद उिा सक
े ।
(Education develops man’s faculty, specially his
mind so that he may be able to enjoy the
contemplation of supreme truth , goodness and
beauty.-Aristotle )
शिक्षा की आधुर्नक अवधारणा एवं अर्थ
 मनुष्य की अंतननथटहत पूणथता को अशभव्यतत करना ह
शिक्षा है।- स्त्वामी त्तववेकानंद
( Education is manifestation of perfection already
present in man. -Swami Vivekananda )
 शिक्षा से मेरा अशभप्राय बालक एवं मनुष्य क
े िर र,
मक्स्त्तष्क तर्ा आत्मा क
े सवाांगीण एवं सवोतम त्तवकास
से है।- महात्मा गांधी
( By Education I mean an all around drawing out of
the best in the child and man –body, mind , and
spirit .-Mahatma Gandhi )
शिक्षा की आधुर्नक अवधारणा एवं अर्थ
 शिक्षा से तात्पयथ अंतननथटहत िक्ततयों तर्ा बाह्य जगत
क
े मध्य समन्वय स्त्र्ात्तपत करने से है।–हरबिथ स्त्पेन्सर
( Education means establishment of co-ordination
between the inherent powers and the outer word.-
Herbert Spenser )
 शिक्षा व्यक्तत की जन्मजात िक्ततयों का स्त्वाभात्तवक,
समरस तर्ा प्रगनतिील त्तवकास है ।- पेस्त्तालॉजी
(Education is a natural, harmonious, and
progressive development of man’s innate powers .-
Pestalozzi )
शिक्षा की आधुर्नक अवधारणा एवं अर्थ
 शिक्षा व्यक्तत की उन समस्त्त क्षमतायों का त्तवकास करना है
जो उसे अपने वातावरण को ननयंबरत करने तर्ा अपनी
संभावनायों को पूरा करने योग्य बनाएंगी।-जॉन डीवी
( Education is the development of all those capacities in
the individual which will enable him to control his
environment and fulfil his possibilities.- John Dewey)
 शिक्षा एक प्रक्रिया है , क्जसमें तर्ा क्जसक
े द्वारा बालक क
े
ज्ञान चररर तर्ा व्यवहार को ढाला तर्ा पररवर्तथत क्रकया जाता
है –ड्रेवर
(Education is a process in which and by which
the knowledge character and behaviour of the
young are shaped and moulded .- Drever)
शिक्षा की आधुर्नक अवधारणा एवं अर्थ
 “Education is the Modification of behaviour”
“शिक्षा व्यवहार का पररमाजथन है”
इस प्रकार यह कहा जा सकता है क्रक,
“शिक्षा व्यक्तत की अंतननथटहत , और जन्मजात िक्ततयों का
त्तवकास करक
े उसक
े व्यवहार को पररमाक्जथत करती है
क्जस से व्यक्तत अपने वातावरण से सवोिम सामंजस्त्य
स्त्र्ात्तपत कर पता है।”
शिक्षा का संक
ु चचत अर्थ
 संक
ु चचत अर्थ में त्तवद्यालयी शिक्षा को ह शिक्षा मानते
हैं ।
पूवथ ननधाथररत योजना
ननयंबरत वातावरण
ननक्श्चत त्तवषय -वस्त्तु
ननक्श्चत त्तवचध
ननक्श्चत काल /समय
शिक्षक क
े क्न्ित
बालक का गौण स्त्र्ान
सोद्देश्य सामाक्जक प्रकिया
संक
ु चचत शिक्षा
शिक्षा का व्यापक अर्थ
 व्यापक अर्थ में शिक्षा का तात्पयथ बालक क
े उन सभी
अनुभवों से होता है क्जसका प्रभाव उसक
े उपर जन्म
से लेकर मृत्यु तक पड़ता है । अर्ाथत् शिक्षा जीवन पयांत
चलने वाल प्रकिया है।
कोई पूवथ ननधाथररत योजना नह ं
अननयंबरत वातावरण
अननक्श्चत त्तवषय -वस्त्तु
अननक्श्चत त्तवचध
अननक्श्चत काल /समय
बालक का मुख्य स्त्र्ान /बालक क
े क्न्ित
शिक्षक का गौण स्त्र्ान
बालक का सवाांगीण त्तवकास
व्यापक
शिक्षा
शिक्षा का ववश्लेषणात्मक अर्थ
शिक्षा जन्मजात िक्ततयों क
े त्तवकास क
े रूप में ।
शिक्षा नवीन सूचनायों क
े रूप में ।
शिक्षा एक प्रगनतिील प्रकिया क
े रूप में ।
शिक्षा त्तवद्यालय की पररचध क
े सीशमत ज्ञान क
े रूप में ।
शिक्षा जीवन पयांत चलने वाल प्रकिया क
े रूप में ।
शिक्षा का वास्त्तत्तवक अर्थ (अवाथचीन एवं वैज्ञाननक दृक्स्त्िकोण से ) ।
शिक्षा द्त्तवध्रुवीय प्रकिया क
े रूप में ।
शिक्षा एक बरध्रुवीय प्रकिया क
े रूप में ।
शिक्षा द्ववध्रुवीय प्रक्रिया क
े रूप में
शिक्षा की द्त्तवध्रुवीय प्रकिया (Bi-Polar Process of
Education) का सब से पहले एडम्स ने अपनी पुस्त्तक”
“Evaluation of Educational Theory” में बताया र्ा ।
शिक्षण-प्रकिया
शिक्षक
शिक्षार्ी
शिक्षा एक त्ररध्रुवीय प्रक्रिया क
े रूप में
शिक्षा की बरध्रुवीय प्रकिया ( Tri-polar process of
education) की अवधारणा अमेररकी प्रयोजनवाद
दािथननक जॉन डीवी ने टदया र्ा ।
जॉन डीवी क
े अनुसार शिक्षा एक सामाक्जक प्रक्रिया है।
डीवी ववद्यालय को समाज का लघु रूप मानते हैं
शिक्षक
शिक्षार्ी पाठ्यचयाथ
शिक्षा
प्रकिया

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शिक्षा की संकल्पना (Concept of Education)

  • 1. शिक्षा की संकल्पना/ अवधारणा ( CONCEPT OF EDUCATION) By. Shiv Kumar Yadav Asst. Professor, HNBPG Collage , Pratapgarh ,UP Email: [email protected]
  • 2. शिक्षा की अवधारणा  शिक्षा की व्युत्पन्निास्त्रीय (Etymological )अवधारणा एवं अर्थ  शिक्षा की प्राचीन भारतीय एवं पाश्चात्य अवधारणा एवं अर्थ  शिक्षा की आधुननक अवधारणा एवं अर्थ  शिक्षा का संक ु चचत एवं व्यापक अर्थ शिक्षा की व्युत्पन्निास्त्रीय (Etymological )अवधारणा एवं अर्थ  संस्त्कृ त भाषा क े संदभथ में  लैटिन भाषा क े संदभथ में
  • 3. व्युत्पन्निास्त्रीय अवधारणा एवं अर्थ संस्त्कृ त भाषा क े संदभथ में  संस्त्कृ त भाषा क े “शिक्ष्” धातु में “अ” प्रत्यय लगने से शिक्षा िब्द की उत्पत्ति हुयी है । “शिक्ष्” धातु “अ” प्रत्यय शिक्षा
  • 4. व्युत्पन्निास्त्रीय अवधारणा एवं अर्थ लैटिन भाषा क े संदभथ में “Education” िब्द ननम्नशलखित तीन लैटिन िब्दों से व्युत्पन्न माना जाता है । Latin terms / words meaning Educatum To Train,To act of teaching and training ( शिक्षक्षत एवं प्रशिक्षक्षत करना ) Educare To Educate,To Bring Up, To Lead Out (त्तवकशसत करना/आगे बढ़ाना ) Educere To lead out, To draw out ( त्तवकशसत करना /बाहर ननकालना
  • 5. व्युत्पन्निास्त्रीय अवधारणा एवं अर्थ “Educatum” िब्द दो लैटिन िब्दों “E” (ए) तर्ा “Duco”(ड्यूको) से उत्पन्न माना जाता है । अंदर से बाहर लाना/ आगे बढ़ाना अर्ाथत् मानव की अंतर्नथहहत िक्ततयों का सवाांगीण ववकास करना ही शिक्षा है। “E” ( from inner/ out of ) “Duco” ( To Lead) Educatum
  • 6. शिक्षा की प्राचीन भारतीय अवधारणा एवं अर्थ  वेदों क े अनुसार – वेद िब्द की उत्पत्ति संस्त्कृ त भाषा क े “ववद्” धातु में “अ” प्रत्यय लगने से हुयी है। प्राचीन भारत में त्तवद्या शिक्षा की पयाथय र्ी त्तवद्या का अर्थ अज्ञान से मुक्तत /सत्य – असत्य में त्तववेकपूणथ भेद करना र्ा ।  िंकराचायथ जी क े अनुसार “सा त्तवद्या या त्तवमुततये” अर्ाथत् त्तवद्या वह है जो मानव को अज्ञान से/ कटिनाइयों से मुक्तत प्रदान करे। “अ” प्रत्यय त्तवद्या “त्तवद्” धातु
  • 7. शिक्षा की प्राचीन भारतीय अवधारणा एवं अर्थ  उपर्नषद् क े अनुसार -“त्तवद्या अमृतमश्नुते” (अमृतम् + अश्नुते) अर्ाथत् त्तवद्या से अमृत शमलता है । उपर्नषदीय ववद्या-  परा त्तवद्या आध्याक्त्मक ज्ञान  अपरा त्तवद्या सांसाररक ज्ञान  उपननषद् क े अनुसार शिक्षा मोक्ष प्राक्तत का साधन है ।  “ज्ञान वह है जो मनुष्य को सभी बंधनों से मुक्तत टदलाए” । ( Education is something which liberates man from all
  • 8. शिक्षा की प्राचीन भारतीय अवधारणा एवं अर्थ  गीता क े अनुसार-  “ऋते ज्ञानान्न मुक्तत:” अर्ाथत् ज्ञान क े बबना मुक्तत नह ं शमलती है ।  “नटह ज्ञानेन सदृिम पत्तवरशमह त्तवद्यते” अर्ाथत् ज्ञान क े समान क ु छ भी पत्तवर नह ं है। इस प्रकार वेदों , उपननषदों और लगभग सभी भारतीय दिथनों क े अनुसार त्तवद्या / ज्ञान / शिक्षा वह है जो सत्य- असत्य में भेद कराये, संसार क े सभी बंधनों से मुक्तत प्रदान कर मोक्ष की प्राक्तत कराये । भारतीय संस्त्कृ र्त में शिक्षा को मनुष्य का तीसरा नेर कहा गया है– तृतीयं मनुष्यस्त्य नेरम् । “ककं न साधयनत कल्पलतेव त्तवद्या” अर्ाथत् त्तवद्या कल्पलता क े समान है जो सभी चीजों की पूनतथ करती है।
  • 9. शिक्षा की प्राचीन पाश्चात्य अवधारणा एवं अर्थ  सुकरात क े अनुसार - शिक्षा का तात्पयथ संसार क े उन सवथमान्य त्तवचारों को प्रकि करने से है जो प्रत्येक व्यक्तत क े मक्स्त्तष्क में ननटहत है । ( Education means bringing out of the ideas of universal validity which are latent in the mind of every man.- Socrates)  तलेिो क े अनुसार - शिक्षा व्यक्तत क े िर र तर्ा आत्मा में ननटहत उस समस्त्त सौंदयथ और पूणथता को त्तवकशसत करती है क्जसकी उसमें क्षमता है। ( Education develops in the body and in the soul of the pupil, all the beauty and all the perfection of which he is capable.- Plato)
  • 10. शिक्षा की प्राचीन पाश्चात्य अवधारणा एवं अर्थ  अरस्त्तु क े अनुसार - शिक्षा व्यक्तत की योग्यता का और त्तविेष रूप से मानशसक योग्यता का त्तवकास करती है क्जससे कक वह परम सत्य, शिव और सुंदर क े चचंतन का आनंद उिा सक े । (Education develops man’s faculty, specially his mind so that he may be able to enjoy the contemplation of supreme truth , goodness and beauty.-Aristotle )
  • 11. शिक्षा की आधुर्नक अवधारणा एवं अर्थ  मनुष्य की अंतननथटहत पूणथता को अशभव्यतत करना ह शिक्षा है।- स्त्वामी त्तववेकानंद ( Education is manifestation of perfection already present in man. -Swami Vivekananda )  शिक्षा से मेरा अशभप्राय बालक एवं मनुष्य क े िर र, मक्स्त्तष्क तर्ा आत्मा क े सवाांगीण एवं सवोतम त्तवकास से है।- महात्मा गांधी ( By Education I mean an all around drawing out of the best in the child and man –body, mind , and spirit .-Mahatma Gandhi )
  • 12. शिक्षा की आधुर्नक अवधारणा एवं अर्थ  शिक्षा से तात्पयथ अंतननथटहत िक्ततयों तर्ा बाह्य जगत क े मध्य समन्वय स्त्र्ात्तपत करने से है।–हरबिथ स्त्पेन्सर ( Education means establishment of co-ordination between the inherent powers and the outer word.- Herbert Spenser )  शिक्षा व्यक्तत की जन्मजात िक्ततयों का स्त्वाभात्तवक, समरस तर्ा प्रगनतिील त्तवकास है ।- पेस्त्तालॉजी (Education is a natural, harmonious, and progressive development of man’s innate powers .- Pestalozzi )
  • 13. शिक्षा की आधुर्नक अवधारणा एवं अर्थ  शिक्षा व्यक्तत की उन समस्त्त क्षमतायों का त्तवकास करना है जो उसे अपने वातावरण को ननयंबरत करने तर्ा अपनी संभावनायों को पूरा करने योग्य बनाएंगी।-जॉन डीवी ( Education is the development of all those capacities in the individual which will enable him to control his environment and fulfil his possibilities.- John Dewey)  शिक्षा एक प्रक्रिया है , क्जसमें तर्ा क्जसक े द्वारा बालक क े ज्ञान चररर तर्ा व्यवहार को ढाला तर्ा पररवर्तथत क्रकया जाता है –ड्रेवर (Education is a process in which and by which the knowledge character and behaviour of the young are shaped and moulded .- Drever)
  • 14. शिक्षा की आधुर्नक अवधारणा एवं अर्थ  “Education is the Modification of behaviour” “शिक्षा व्यवहार का पररमाजथन है” इस प्रकार यह कहा जा सकता है क्रक, “शिक्षा व्यक्तत की अंतननथटहत , और जन्मजात िक्ततयों का त्तवकास करक े उसक े व्यवहार को पररमाक्जथत करती है क्जस से व्यक्तत अपने वातावरण से सवोिम सामंजस्त्य स्त्र्ात्तपत कर पता है।”
  • 15. शिक्षा का संक ु चचत अर्थ  संक ु चचत अर्थ में त्तवद्यालयी शिक्षा को ह शिक्षा मानते हैं । पूवथ ननधाथररत योजना ननयंबरत वातावरण ननक्श्चत त्तवषय -वस्त्तु ननक्श्चत त्तवचध ननक्श्चत काल /समय शिक्षक क े क्न्ित बालक का गौण स्त्र्ान सोद्देश्य सामाक्जक प्रकिया संक ु चचत शिक्षा
  • 16. शिक्षा का व्यापक अर्थ  व्यापक अर्थ में शिक्षा का तात्पयथ बालक क े उन सभी अनुभवों से होता है क्जसका प्रभाव उसक े उपर जन्म से लेकर मृत्यु तक पड़ता है । अर्ाथत् शिक्षा जीवन पयांत चलने वाल प्रकिया है। कोई पूवथ ननधाथररत योजना नह ं अननयंबरत वातावरण अननक्श्चत त्तवषय -वस्त्तु अननक्श्चत त्तवचध अननक्श्चत काल /समय बालक का मुख्य स्त्र्ान /बालक क े क्न्ित शिक्षक का गौण स्त्र्ान बालक का सवाांगीण त्तवकास व्यापक शिक्षा
  • 17. शिक्षा का ववश्लेषणात्मक अर्थ शिक्षा जन्मजात िक्ततयों क े त्तवकास क े रूप में । शिक्षा नवीन सूचनायों क े रूप में । शिक्षा एक प्रगनतिील प्रकिया क े रूप में । शिक्षा त्तवद्यालय की पररचध क े सीशमत ज्ञान क े रूप में । शिक्षा जीवन पयांत चलने वाल प्रकिया क े रूप में । शिक्षा का वास्त्तत्तवक अर्थ (अवाथचीन एवं वैज्ञाननक दृक्स्त्िकोण से ) । शिक्षा द्त्तवध्रुवीय प्रकिया क े रूप में । शिक्षा एक बरध्रुवीय प्रकिया क े रूप में ।
  • 18. शिक्षा द्ववध्रुवीय प्रक्रिया क े रूप में शिक्षा की द्त्तवध्रुवीय प्रकिया (Bi-Polar Process of Education) का सब से पहले एडम्स ने अपनी पुस्त्तक” “Evaluation of Educational Theory” में बताया र्ा । शिक्षण-प्रकिया शिक्षक शिक्षार्ी
  • 19. शिक्षा एक त्ररध्रुवीय प्रक्रिया क े रूप में शिक्षा की बरध्रुवीय प्रकिया ( Tri-polar process of education) की अवधारणा अमेररकी प्रयोजनवाद दािथननक जॉन डीवी ने टदया र्ा । जॉन डीवी क े अनुसार शिक्षा एक सामाक्जक प्रक्रिया है। डीवी ववद्यालय को समाज का लघु रूप मानते हैं शिक्षक शिक्षार्ी पाठ्यचयाथ शिक्षा प्रकिया